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बंगाल चुनाव: 90% हिंदू आबादी वाली सभी 49 सीटों पर खिला 'कमल'

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06 मई 2026, 03:20 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

भाजपा
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कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीतिक जमीन को पूरी तरह से बदल दिया है. निर्वाचन आंकड़ों के विश्लेषण से साफ है कि इस बार 200 से अधिक सीटें जीतकर सत्ता के करीब पहुंची भाजपा की सफलता का मुख्य आधार हिंदू बहुल सीटों पर हुआ जबरदस्त ध्रुवीकरण रहा. 


राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 49 सीटें ऐसी हैं जहां हिंदू मतदाताओं की संख्या लगभग 90 प्रतिशत है, और चौंकाने वाली बात यह है कि भाजपा ने इन सभी 49 सीटों पर क्लीन स्वीप करते हुए जीत हासिल की है.


यह बदलाव कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने इनमें से 27 सीटें जीती थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी ममता बनर्जी की पार्टी इन क्षेत्रों में 29 सीटों पर आगे थी. 


लेकिन इस बार हुगली के श्रीरामपुर और चिनसुराह जैसे तृणमूल के अभेद्य किलों में भी भाजपा ने सेंध लगा दी. यहां तक कि सबांग से सात बार के विधायक और दिग्गज मंत्री मानस भुइयां को भी अपनी सीट गंवानी पड़ी.


विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद वहां हिंदुओं पर हुए हमलों और घुसपैठ के मुद्दे ने बंगाल में वोटों के एकीकरण को गति दी. भाजपा और आरएसएस से जुड़े संगठनों के घर-घर जनसंपर्क अभियान ने मतदाताओं के मन में असुरक्षा की भावना और बदलाव की जरूरत को गहराई से बैठा दिया. 


दूसरी ओर, ममता बनर्जी द्वारा दीघा में 250 करोड़ रुपये की लागत से जगन्नाथ धाम मंदिर बनवाने और धार्मिक मेलों के आयोजन जैसे कदम भी इस 'हिंदू लहर' को रोकने में नाकाम रहे. राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती के अनुसार, चुनाव आयोग के कड़े इंतजामों के कारण इस बार हिंदू मतदाताओं का भारी संख्या में मतदान केंद्र तक पहुंचना भी भाजपा की इस ऐतिहासिक बढ़त का एक प्रमुख कारण बना.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP