पेंटागन की भारत-चीन पर रिपोर्ट पर भड़का बीजिंग
बीजिंग । डेस्क: चीन ने भारत के अरुणाचल प्रदेश पर अपने दावे को औपचारिक रूप से ‘मुख्य हित’ (कोर इंटरेस्ट) की श्रेणी में शामिल कर लिया है. यह दावा हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन द्वारा कांग्रेस में पेश की गई वार्षिक रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब ताइवान के साथ-साथ भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश को भी अपने तथाकथित मूल हितों का हिस्सा मानता है. इस आकलन के बाद भारत-चीन सीमा पर भविष्य में तनाव बढ़ने की आशंका एक बार फिर गहरा गई है.
पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हालिया तनाव में कमी चीन की दीर्घकालिक ‘द्वैध रणनीति’ का हिस्सा है. इस रणनीति के तहत चीन एक ओर सीमा पर अपेक्षाकृत शांत स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपने करीबी सहयोगी पाकिस्तान के जरिए भारत पर निरंतर सैन्य और रणनीतिक दबाव बनाए रखना चाहता है.
हालांकि, इस रिपोर्ट पर चीन की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. बीजिंग ने पेंटागन की रिपोर्ट को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ करार देते हुए उसकी कड़ी निंदा की है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि यह रिपोर्ट चीन की रक्षा नीति को तोड़-मरोड़ कर पेश करती है और इसका उद्देश्य चीन तथा अन्य देशों, विशेषकर भारत के बीच विभाजन पैदा करना है. उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ऐसी रिपोर्टों के जरिए अपने सैन्य वर्चस्व को बनाए रखने के लिए बहाने तलाश रहा है.
लिन जियान ने स्पष्ट कहा कि चीन इस रिपोर्ट का दृढ़ता से विरोध करता है. उन्होंने यह भी कहा कि भारत-चीन संबंधों को लेकर बीजिंग दीर्घकालिक और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाता है. उनके अनुसार, चीन भारत के साथ संवाद मजबूत करने, आपसी विश्वास बढ़ाने, सहयोग को आगे बढ़ाने और मतभेदों को सही तरीके से संभालने के लिए तैयार है, ताकि द्विपक्षीय संबंध स्वस्थ और स्थिर दिशा में आगे बढ़ सकें.
एलएसी से जुड़े पेंटागन के आकलन पर प्रतिक्रिया देते हुए लिन जियान ने कहा कि सीमा विवाद भारत और चीन के बीच का द्विपक्षीय मामला है और मौजूदा सीमा स्थिति सामान्य रूप से स्थिर बनी हुई है. उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों देशों के बीच संवाद और संपर्क के तंत्र सुचारू रूप से काम कर रहे हैं. साथ ही, उन्होंने तीसरे देशों द्वारा किए जा रहे “आधारहीन और गैर-जिम्मेदाराना” बयानों का विरोध किया.
चीन के रक्षा मंत्रालय ने भी अमेरिकी रिपोर्ट की आलोचना की है. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने कहा कि अमेरिका वर्षों से इस तरह की रिपोर्ट प्रकाशित कर चीन के आंतरिक मामलों में गंभीर हस्तक्षेप कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में चीन की राष्ट्रीय रक्षा नीति को दुर्भावनापूर्ण ढंग से गलत तरीके से पेश किया गया है और चीनी सेना की सामान्य गतिविधियों को बदनाम करने की कोशिश की गई है.
पेंटागन की रिपोर्ट में चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग का भी उल्लेख किया गया है. इसमें यह भी कहा गया है कि बीजिंग पाकिस्तान में एक सैन्य अड्डा स्थापित करने की संभावना पर विचार कर चुका है. हालांकि, इस मुद्दे पर पूछे गए सीधे सवालों का जवाब देने से चीनी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने परहेज किया.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2024 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की प्रक्रिया शुरू हुई. इस बैठक से पहले एलएसी पर कुछ शेष गतिरोध वाले क्षेत्रों से सैनिकों की वापसी पर सहमति बनी थी. इसके बाद सीमा प्रबंधन, सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा में ढील और शिक्षाविदों व पत्रकारों के आदान-प्रदान जैसे मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ी.
अमेरिकी रक्षा विभाग का आकलन है कि चीन एलएसी पर तनाव में कमी का इस्तेमाल भारत के साथ संबंधों को स्थिर करने और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को और गहरा होने से रोकने के लिए करना चाहता है. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के नेतृत्व ने ‘मुख्य हित’ की परिभाषा का विस्तार करते हुए ताइवान, दक्षिण चीन सागर, सेनकाकू द्वीप और अब भारत के अरुणाचल प्रदेश को भी इसमें शामिल कर लिया है, जिससे क्षेत्रीय भू-राजनीति में नई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं.