बांग्लादेश: तारिक रहमान ने 'यूनिटी गवर्नमेंट' के प्रस्ताव को ठुकराया
ढाका । डेस्क: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान ने अपने प्रतिद्वंद्वी दल जमात-ए-इस्लामी द्वारा दिए गए 'राष्ट्रीय एकता सरकार' के प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है.
करीब दो दशक के निर्वासन के बाद लंदन से स्वदेश लौटे 60 वर्षीय रहमान ने दृढ़ता के साथ कहा कि उनकी पार्टी अपने दम पर चुनाव जीतने और सरकार बनाने में सक्षम है. उन्होंने लोकतांत्रिक ढांचे का हवाला देते हुए सवाल किया कि यदि सभी दल सरकार में शामिल हो जाएंगे, तो विपक्ष की भूमिका कौन निभाएगा.
रहमान ने उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद जमात-ए-इस्लामी एक 'सशक्त विपक्ष' के रूप में अपनी भूमिका निभाएगी.
अगस्त 2024 में छात्र विद्रोह के बाद शेख हसीना के देश छोड़कर भारत जाने और अंतरिम सरकार के गठन के बाद यह देश का पहला बड़ा चुनाव है. चुनाव में बीएनपी का मुख्य मुकाबला पुनर्जीवित हुए दक्षिणपंथी समूह जमात-ए-इस्लामी से माना जा रहा है.
भारत के साथ रिश्तों और शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर बात करते हुए रहमान ने कहा कि वह किसी खास देश की ओर झुकने के बजाय बांग्लादेश की संप्रभुता और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देंगे.
उन्होंने स्पष्ट किया कि हसीना को बांग्लादेशी कानून के तहत सजा सुनाई जा चुकी है और उन्हें न्याय के कटघरे में लाने के लिए वापस लाया जाना चाहिए. वहीं, रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर मानवीय रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि जब तक म्यांमार में हालात सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक वे बांग्लादेश में रह सकते हैं.