बांग्लादेश में हादी की पार्टी इंकलाब मंच का भारत के खिलाफ मुहिम
ढाका । डेस्क: बांग्लादेश में मारे गए इंकलाब मंच के संयोजक ओसमन हादी की हत्या को लेकर राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है. हादी की पार्टी इंकलाब मंच ने न केवल हत्यारों, साजिशकर्ताओं और मददगारों की गिरफ्तारी की मांग की है, बल्कि भारत को निशाना बनाते हुए तीन अन्य बड़े राजनीतिक और कूटनीतिक दावे भी सामने रखे हैं.
ढाका के शाहबाग चौराहे पर आयोजित ‘सर्वात्माक अवरोध’ कार्यक्रम से इंकलाब मंच ने चार सूत्री मांगों की घोषणा की. मंच ने अंतरिम सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर इन मांगों को पूरा किया जाए. इंकलाब मंच का कहना है कि उनकी पहली और सबसे अहम मांग ओसमन हादी की हत्या में शामिल सभी दोषियों को गिरफ्तार कर उन्हें न्याय के कठघरे में लाना है.
इसके अलावा संगठन ने भारत से जुड़े दो विवादास्पद मुद्दे भी उठाए हैं. इंकलाब मंच ने बांग्लादेश में कार्यरत भारतीय नागरिकों के वर्क परमिट रद्द करने की मांग की है. संगठन का तर्क है कि देश की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी है.
वहीं तीसरी मांग में मंच ने अंतरिम सरकार से कहा है कि यदि भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अवामी लीग के अन्य नेताओं को बांग्लादेश को नहीं सौंपता है, तो नई दिल्ली के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा दायर किया जाए.
चौथी मांग के तहत इंकलाब मंच ने बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभागों में मौजूद उन अधिकारियों को बर्खास्त करने की मांग की है, जिन पर विरोधाभासी बयान देकर जनता को भ्रमित करने का आरोप है.
संगठन का दावा है कि सुरक्षा एजेंसियों और सेना में अवामी लीग से जुड़े कई लोग अब भी सक्रिय हैं, जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.
इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने कहा कि 24 कार्य दिवसों के भीतर ओसमन हादी के हत्यारों को गिरफ्तार कर मुकदमा पूरा करना उनकी प्राथमिक मांग है. साथ ही अन्य तीन मांगों को भी इसी अंतरिम सरकार के कार्यकाल में पूरा किया जाना चाहिए.
रविवार रात ही मंच ने अपना ‘सर्वात्माक अवरोध’ कार्यक्रम वापस लेने की घोषणा कर दी, लेकिन नए आंदोलन की चेतावनी भी दी.
संगठन ने सोमवार दोपहर दो बजे शाहबाग में स्कूलों, विश्वविद्यालयों और मदरसों के छात्रों से बड़ी संख्या में जुटने की अपील की है. मंच ने साफ कहा है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
गौरतलब है कि 12 दिसंबर को ढाका की सड़कों पर गोली लगने से ओसमन हादी गंभीर रूप से घायल हो गए थे. सरकारी पहल पर उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, जहां छह दिन बाद उनकी मौत हो गई.
इसके बाद बांग्लादेश में व्यापक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए. गुस्साई भीड़ ने कई सरकारी, सांस्कृतिक इमारतों और मीडिया दफ्तरों को नुकसान पहुंचाया. पुलिस ने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मुख्य आरोपी फैसल करीम और उसके सहयोगी आलमगीर शेख अब तक फरार हैं.
बढ़ते दबाव के बीच अंतरिम सरकार ने भरोसा दिलाया है कि हादी हत्या मामले का निपटारा उसी के कार्यकाल में किया जाएगा.