बांग्लादेश का चुनाव नौटंकी एक धोखा है- शेख हसीना
नई दिल्ली । डेस्क: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की अध्यक्ष शेख हसीना ने बांगलादेश में गुरूवार को हुए आम चुनावों को पूरी तरह से 'प्रहसन' और 'धोखाधड़ी' करार दिया है. उन्होंने दावा किया कि जनता ने इस मतदान प्रक्रिया को पूरी तरह नकार दिया है और अधिकांश मतदान केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा.
शेख हसीना ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों और देश के संविधान के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत अवामी लीग को चुनाव से बाहर रखा गया और मतदाताओं को डराया-धमकाया गया.
शेख हसीना ने मतदान के आंकड़ों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने चुनाव आयोग के डेटा का हवाला देते हुए कहा कि दोपहर तक जो मतदान प्रतिशत दिखाया गया, वह पूरी तरह अस्वाभाविक और संदिग्ध है. हसीना के अनुसार, सुबह 11 बजे तक मतदान की दर मात्र 14.96 प्रतिशत थी, लेकिन अगले ही एक घंटे में यह अचानक बढ़कर 32.88 प्रतिशत तक पहुंच गई.
उन्होंने तर्क दिया कि बांग्लादेश के चुनावी इतिहास में सुबह के समय ही सबसे ज्यादा भीड़ होती है, जबकि दोपहर के बाद मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या कम हो जाती है. ऐसे में अचानक आंकड़ों में आए इस उछाल को उन्होंने फर्जीवाड़े और मतपत्रों पर अवैध रूप से मुहर लगाने का परिणाम बताया.
पूर्व प्रधानमंत्री ने चुनाव के दौरान हिंसा और भ्रष्टाचार के भी आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि मतदान शुरू होने से एक रात पहले ही केंद्रों पर कब्जा करने, गोलियां चलाने और वोट खरीदने के लिए बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन हुआ.
शेख हसीना का दावा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को जबरन मतदान केंद्रों पर ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद जनता ने इस 'धोखाधड़ी वाले चुनाव' का बहिष्कार किया. उन्होंने कहा कि राजधानी ढाका समेत देश के बड़े हिस्सों में पोलिंग बूथ खाली नजर आए.
इस चुनाव में अवामी लीग की भागीदारी नहीं थी, क्योंकि अंतरिम सरकार ने उनकी गतिविधियों पर रोक लगा रखी है. शेख हसीना ने मांग की है कि इस 'अवैध और असंवैधानिक' चुनाव को तत्काल रद्द किया जाए और अवामी लीग पर लगी पाबंदी को हटाया जाए.
उन्होंने एक बार फिर अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि देश में एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव केवल एक उचित कार्यवाहक सरकार के अधीन ही संभव है. साथ ही, उन्होंने राजनीतिक कैदियों, शिक्षकों और पत्रकारों के खिलाफ दर्ज किए गए झूठे मामलों को वापस लेने की भी अपील की.
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल बीएनपी ने भी कम मतदान प्रतिशत पर चिंता व्यक्त की है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं.