बलरामपुर: पुलिया न होने से बीमार महिला को 3 KM बांस की पालकी में ढोया
बलरामपुर । संवाददाता: बलरामपुर जिले की ग्राम पंचायत सरगवां स्थित बम्हनी नाले पर आजादी के दशकों बाद भी पुल निर्माण नहीं होने से स्थानीय आबादी बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन करने को मजबूर है. हाल ही में इस प्रशासनिक उपेक्षा की एक गंभीर तस्वीर तब सामने आई, जब गांव की एक बीमार महिला तक समय पर 108 एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी.
मजबूरी में परिजनों और ग्रामीणों ने महिला को बांस की पालकी पर लिटाकर अपने कंधों पर उठाया और उफनते नाले तथा पथरीले रास्तों से होते हुए करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाया. इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के दावों की पोल खोल दी है.
तकरीबन 500 की आबादी वाले इस क्षेत्र में विशेष पिछड़ी जनजाति 'पहाड़ी कोरवा' के परिवार भी निवास करते हैं. हर साल मानसून के दौरान बम्हनी नाला उफान पर आ जाता है, जिससे यह पूरा इलाका कटकर टापू में तब्दील हो जाता है.
रोजमर्रा के कामों, स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए घुटने भर पानी और तेज बहाव के बीच से गुजरना बेहद जोखिम भरा होता है. आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य सुविधाएं न मिल पाना यहां के निवासियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
वर्षों से लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे क्षुब्ध ग्रामीणों ने हाल ही में नाले के किनारे एकत्रित होकर प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन भी किया. हाथों में नारे लिखी तख्तियां थामे लोगों ने अपनी वाजिब मांगों के समर्थन में आवाज उठाई.
ग्रामीणों का दर्द है कि पिछले 25 वर्षों से वे जनदर्शन, प्रशासनिक अफसरों और जनप्रतिनिधियों के चौखट पर पुलिया निर्माण की अर्जी लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है. वहीं इस पूरे मामले में जनपद पंचायत बलरामपुर के सीईओ दीप राजकांत का कहना है कि विषय उनके संज्ञान में नहीं था और वे जल्द ही वस्तुस्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक कदम उठाएंगे.