यूएन में बालेन्द्र शाह- जलवायु परिवर्तन पर दुनिया की चुप्पी बनी बड़ी चुनौती
नई दिल्ली । डेस्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने पिछले महीने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ को पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी करार दिया.
पीएम बालेन्द्र शाह ने वैश्विक नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अगस्त में आई त्रासदी केवल एक स्थानीय आपदा नहीं थी. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दुनिया ने इस चेतावनी को वाकई सुना है? उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक नेतृत्व चेतावनियों को आवश्यक गति और पैमाने के साथ ठोस कदम में बदलने में विफल रहा है.
26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़, मिट्टी और पत्थरों के मलबे के कारण उत्तरी नेपाल और चीन-तिब्बत सीमा क्षेत्र में कम से कम 1,453 लोगों की मौत हो चुकी है. नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 5,500 लोग अभी भी लापता हैं, जबकि 13,795 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है.
वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (WWA) के वैज्ञानिकों की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आपदा केवल किसी एक चरम मौसमी घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि दीर्घकालिक ग्लोबल वार्मिंग, ग्लेशियरों के पिघलने, पर्माफ्रॉस्ट के क्षरण और भूगर्भीय अस्थिरता का सम्मिलित परिणाम थी.
संयुक्त राष्ट्र में नेपाल का पक्ष रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों का जलवायु संकट में कोई योगदान नहीं है, वे इसकी सबसे भारी कीमत चुका रहे हैं. नेपाल वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में 0.1 प्रतिशत से भी कम योगदान देता है. देश की लगभग 99 प्रतिशत बिजली पनबिजली से उत्पन्न होती है, और इस बाढ़ के दौरान कई श्रमिक सुरंगों में फंस गए थे.
उन्होंने आगाह किया कि नेपाल के ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं, पहाड़ों की ढलानें अस्थिर हो रही हैं और नदियां अप्रत्याशित रूप से उफान पर आ रही हैं. यह चक्र देश के वर्षों के विकास को एक झटके में नष्ट कर रहा है.
आपदा से निपटने के लिए पीएम शाह ने 'हिमालयन क्लाइमेट रेजिस्टेंस मैकेनिज्म' बनाने का प्रस्ताव रखा. इसमें नेपाल के साथ भारत और चीन शामिल होंगे, जिससे उपग्रह डेटा, तकनीक साझा करने, ग्लेशियर झीलों की निगरानी करने और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के 'लॉस एंड डैमेज फंड' से 20 मिलियन डॉलर की सहायता मांगी है, जो इस कोष से मिलने वाली अधिकतम राशि है.
हालांकि, नेपाल सरकार के प्रारंभिक अनुमान के अनुसार आपदा से करीब 5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. वर्ष 2022 में पाकिस्तान की बाढ़ के बाद गठित इस कोष से अभी तक पहला भुगतान भी शुरू नहीं हुआ है. इस बीच, अमेरिका ने नेपाल को बाढ़ राहत के रूप में 31 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने की घोषणा की है.