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असम: 2016 से अब तक एक लाख परिपक्व पेड़ काटे गए

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08 मार्च 2026, 02:41 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

असम जंगल
असम जंगल

गुवाहाटी । डेस्क: असम में मई 2016 में भाजपा सरकार के गठन के बाद से अब तक विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए एक लाख से अधिक पूर्ण विकसित और परिपक्व पेड़ों को काटा जा चुका है. सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 44 वन्यजीव और क्षेत्रीय प्रभागों में से केवल 15 प्रभागों ने ही 1,06,896 पेड़ों को काटने की पुष्टि की है, जबकि कई प्रभागों से अभी डेटा आना बाकी है. 


असम सरकार ने इस कार्रवाई को अत्यधिक आवश्यकता बताते हुए तर्क दिया है कि बुनियादी ढांचे के विकास, राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण और तेल अन्वेषण परियोजनाओं के लिए यह अनिवार्य था. 

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राज्य के पर्यावरण और वन मंत्री चंद्र मोहन पटोवारी ने कहा कि सरकार ने इस नुकसान की भरपाई के लिए पिछले दो वर्षों में 'अमृत वृक्ष आंदोलन' जैसे अभियानों के माध्यम से लगभग 3.5 करोड़ पौधे लगाए हैं, जिनमें से 70 प्रतिशत से अधिक जीवित हैं.


हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने सरकार के इस तर्क को "वैज्ञानिक रूप से चिंताजनक" करार दिया है. 


कॉटन यूनिवर्सिटी और गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का कहना है कि एक दशक पुराने विशाल पेड़ की तुलना नए लगाए गए पौधे से करना तकनीकी रूप से गलत है क्योंकि एक परिपक्व पेड़ कार्बन भंडारण, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को जो सेवाएं प्रदान करता है, उसे एक पौधा तुरंत प्रतिस्थापित नहीं कर सकता. 


विशेषज्ञों ने इस बात पर भी गहरा क्षोभ व्यक्त किया है कि इतने बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई के बावजूद स्थानीय सूक्ष्म जलवायु और पारिस्थितिकी पर पड़ने वाले प्रभावों का कोई आधिकारिक अध्ययन नहीं किया गया है. 


आरटीआई से यह भी खुलासा हुआ है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कार्यकाल (2021-2025) के दौरान लगभग 65,000 पेड़ काटे गए, जबकि उनके पूर्ववर्ती सर्बानंद सोनोवाल के समय यह संख्या 18,000 से अधिक थी. Symbolic Photo

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP