पत्नी से खर्च का हिसाब मांगना क्रूरता नहीं: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में रहकर माता-पिता को पैसे भेजना या पत्नी से घरेलू खर्च का हिसाब रखने को कहना वैवाहिक क्रूरता नहीं माना जा सकता. अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में निचली अदालतों को बेहद सतर्कता बरतनी चाहिए और ऐसे आरोपों को आपराधिक मुकदमे का आधार नहीं बनाना चाहिए, जो शादीशुदा जीवन की सामान्य उठापटक से जुड़े हों.
न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मिशिगन में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेलिदे स्वागथ कुमार के खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आपराधिक मामले को रद्द कर दिया. यह मामला उनकी अलग रह रही पत्नी नल्ला रश्मि की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसे रद्द करने से तेलंगाना हाईकोर्ट ने इनकार कर दिया था.
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने अपने फैसले में कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप विवाह के “दैनिक उतार-चढ़ाव” को दर्शाते हैं और किसी भी तरह से इन्हें क्रूरता की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि पति द्वारा अपने परिवार को पैसे भेजना किसी आपराधिक कार्रवाई का आधार नहीं बन सकता. इसी तरह, खर्च का विवरण एक्सेल शीट में रखने को कहना भी, अपने आप में, क्रूरता नहीं है.
अदालत ने यह भी कहा कि पति द्वारा वित्तीय मामलों में प्रभुत्व रखने का आरोप, जब तक उससे कोई ठोस मानसिक या शारीरिक नुकसान साबित न हो, क्रूरता नहीं माना जा सकता.
सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि भारतीय समाज की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए यह समझना जरूरी है कि आपराधिक कानून का उपयोग निजी प्रतिशोध या आपसी हिसाब-किताब चुकाने के लिए नहीं किया जा सकता.
पत्नी की ओर से लगाए गए अन्य आरोपों जैसे गर्भावस्था और प्रसव के बाद देखभाल की कमी या वजन को लेकर ताने पर अदालत ने कहा कि ये बातें, यदि प्रथम दृष्टया सही भी मान ली जाएं, तो पति के व्यवहार को नकारात्मक दिखा सकती हैं, लेकिन इन्हें आपराधिक मुकदमे की वजह नहीं बनाया जा सकता.