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अर्जेंटीना: थाली से दूर होती रोटी और कर्ज के जाल में फंसता मध्यम वर्ग

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17 फ़र. 2026, 06:42 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

अर्जेंटीना
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ब्यूनस आयर्स । डेस्क: अर्जेंटीना इस समय एक ऐसे विरोधाभासी आर्थिक संकट से गुजर रहा है, जहां राष्ट्रपति जेवियर माइली के सुधारों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सराहना के बीच आम नागरिक बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहा है. कभी खुशहाल जीवन जीने वाला मध्यम वर्ग अब महीने के बीच में ही खाली जेब होने के कारण 'सर्वाइवल मोड' में आ गया है. 


एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, डिएगो नकासियो जैसे लाखों कर्मचारी, जो पिछले 25 वर्षों से मेहनत कर कर अपना घर और कार बनाने में सफल रहे थे, आज अपनी पूरी तनख्वाह के बावजूद महीने के आखिरी 15 दिन उधार और क्रेडिट कार्ड के भरोसे काटने को मजबूर हैं. नकासियो का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी, जहां दो पूर्णकालिक नौकरियों की आय भी पूरे महीने का भोजन सुनिश्चित नहीं कर पा रही है.


अर्जेंटीना ग्रांडे की रिपोर्ट के अनुसार, देश की लगभग 63 प्रतिशत आबादी ने अपनी बुनियादी सुविधाओं और खर्चों में कटौती की है. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि लोग अब घर, कार या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा का राशन और दवाइयां खरीदने के लिए कर्ज ले रहे हैं. 


समाजशास्त्री वॉयलेटा कैरेरा परेरा के अनुसार, देश में आर्थिक असमानता की खाई तेजी से चौड़ी हुई है. जहां एक ओर आयात खुलने से महंगे वाहनों और संपत्तियों की बिक्री बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी की थाली से भोजन कम हो रहा है. 


नवंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि बैंकिंग और कृषि जैसे क्षेत्रों में वृद्धि के बावजूद, विनिर्माण और वाणिज्य क्षेत्र में भारी गिरावट आई है, जिससे स्थानीय दुकानें और फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं.


राष्ट्रपति माइली की सरकार का दावा है कि उनके कठोर तपस्या कार्यक्रम ने वित्तीय संतुलन बनाया है और विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि की है, लेकिन इसकी कीमत जनता को चुकानी पड़ रही है. मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए वेतन वृद्धि को जानबूझकर रोका गया है, जिससे लोगों की क्रय शक्ति समाप्त हो गई है. 


विशेषज्ञों का तर्क है कि आधिकारिक मुद्रास्फीति के आंकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते, क्योंकि इनमें बिजली और ईंधन जैसे उन खर्चों का सही आकलन नहीं है, जिनमें बेतहाशा वृद्धि हुई है. अर्जेंटीना के केंद्रीय बैंक के आंकड़ों के अनुसार, व्यक्तिगत ऋणों की चूक दर 2010 के बाद से अपने उच्चतम स्तर 11 प्रतिशत पर पहुंच गई है.


शिक्षक और यूनियन कार्यकर्ता वेरोनिका माल्फितानो जैसी मध्यमवर्गीय महिलाएं अब थोक में सामान खरीदने के लिए समूहों में काम कर रही हैं और क्रेडिट कार्ड का केवल न्यूनतम भुगतान कर रही हैं. यह 'ऋण का दुष्चक्र' न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर संकट पैदा कर रहा है. 


हालांकि राजनीतिक स्तर पर ऋणों के पुनर्गठन के लिए नए बिल प्रस्तावित किए जा रहे हैं, लेकिन अर्थशास्त्री लूसिया कैवेलरो का मानना है कि ये केवल अस्थायी राहत हैं. जब तक वेतन बुनियादी टोकरी की कीमतों के बराबर नहीं होंगे, तब तक लोग कर्ज के इस जाल से बाहर नहीं निकल पाएंगे. 


अर्जेंटीना की सड़कों पर आज एक ही सवाल तैर रहा है, क्या व्यापक आर्थिक सुधारों की सफलता का पैमाना केवल कागजी आंकड़े होने चाहिए, या आम आदमी की थाली में रोटी की उपलब्धता?

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP