छत्तीसगढ़ में UCC से अनुसूचित जनजातियों को दायरे से बाहर रखने की घोषणा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है. उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय को पूरी तरह बाहर रखा जाएगा. उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज अपनी सदियों पुरानी परंपराओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक जीवनशैली के अनुसार संचालित होता है, इसलिए उन पर यह कानून लागू नहीं होगा.
वहीं, राज्य के अन्य सभी समुदायों पर यह समान कानून प्रभावी होगा.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान यूसीसी विधेयक को विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा. कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.
यह समिति 15 अक्टूबर तक विभिन्न संगठनों, सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित कर रही है.
सरकार के इस कदम पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने दावा किया कि आदिवासियों को यूसीसी से बाहर रखने का फैसला कांग्रेस के कड़े विरोध और दबाव का परिणाम है.
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा जनजातीय क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने की रही है, लेकिन कांग्रेस आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और ग्राम सभाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी.
फिलहाल, समिति सभी पक्षों से मिले फीडबैक के आधार पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है. उत्तराखंड के बाद छत्तीसगढ़ देश का ऐसा राज्य बनने की ओर अग्रसर है, जहां पर्सनल लॉ व्यवस्था को समाप्त कर बहुसंख्यक आबादी के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी.