ट्रंप की धमकियों के बीच ईरान ने दी तबाही की चेतावनी
तेहरान । डेस्क: ईरान के तेहरान टाइम्स के हवाले से खबर है कि मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों के बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को बार-बार दी जा रही सैन्य धमकियों और समय-सीमाओं के जवाब में ईरान ने अमेरिका को बेहद गंभीर और दूरगामी परिणाम भुगतने की सख्त चेतावनी दी है. इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार को एक कड़ा बयान जारी कर कहा कि यदि ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की नई सैन्य आक्रामकता दिखाई गई, तो यह संघर्ष केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरी दुनिया में फैला दिया जाएगा.
ईरानी सेना ने अमेरिकी और इजरायली नेतृत्व को आगाह करते हुए कहा है कि पिछली बार उन्होंने अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल नहीं किया था, लेकिन इस बार उनके "करारे प्रहार" अमेरिका को ऐसी जगहों पर तबाह कर देंगे जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकता.
इस कूटनीतिक और सैन्य गतिरोध के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी ताकत का अहसास कराया. अराघची ने दावा किया कि हाल ही में भड़के युद्ध के दौरान ईरानी सेना ने इतिहास में पहली बार दुनिया के सबसे अत्याधुनिक माने जाने वाले अमेरिकी एफ-35 (F-35) लड़ाकू विमान को मार गिराया था.
उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस की एक हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा कि वॉशिंगटन ने खुद इस युद्ध में अपने अरबों डॉलर के दर्जनों युद्धक विमान और कई एफ-15ई स्ट्राइक ईगल खोने की बात स्वीकार की है. विदेश मंत्री ने साफ किया कि पिछले संघर्ष से सीख लेते हुए ईरान ने अपनी रक्षा प्रणालियों को और मजबूत किया है, और यदि दोबारा युद्ध शुरू होता है तो ईरान के पास अमेरिका और इजरायल के लिए इससे भी बड़े "सरप्राइज" तैयार हैं.
बता दें कि 28 फरवरी को शुरू हुआ यह भीषण युद्ध 39 दिनों तक चलने के बाद 8 अप्रैल को घोषित हुए युद्धविराम के बाद थमा था. इस दौरान ईरान ने न केवल इजरायल के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि फारस की खाड़ी में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी सीधे हमले किए थे.
ईरान का कहना है कि युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के प्रयासों में सबसे बड़ा रोड़ा अमेरिका की अत्यधिक और अनुचित मांगें हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान पर एक बड़े हमले की योजना को आखिरी वक्त पर टाल दिया. ट्रंप ने इसके पीछे खाड़ी देशों के अनुरोध और बातचीत चलने का हवाला दिया, हालांकि 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने दावा किया है कि खाड़ी देश ऐसे किसी हमले की योजना से पूरी तरह अनजान थे.
वास्तव में, अमेरिकी रक्षा अधिकारी भी मानते हैं कि ईरानी कमांडरों ने अमेरिकी फाइटर जेट्स के उड़ान पैटर्न का बारीकी से अध्ययन कर लिया है, जिससे अमेरिकी रणनीतियां अब उनके लिए बेअसर साबित हो रही हैं. इसके अलावा, युद्ध की स्थिति में अमेरिका को घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई और ईंधन की आसमान छूती कीमतों का भी डर सता रहा है.
ईरान के तेहरान टाइम्स के हवाले से खबर है कि ग्लोबल इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने अमेरिका को सलाह दी है कि वह ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखे ताकि वहां आंतरिक असंतोष पैदा किया जा सके, जबकि युद्ध की स्थिति में अमेरिका ईरान के बिजली ग्रिड और गैस संकट जैसे बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की फिराक में है.
इसके विपरीत, यमन के अंसारुल्लाह (हूती) ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान पर हमला हुआ तो वे रेड सी और रणनीतिक बाब अल-मंडेब जलडमरू मध्य में समुद्री नौवहन को पूरी तरह ठप कर देंगे.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी के जवाब में ईरान फारस की खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर पहले ही सीमित हमला (प्रिवेंटिव स्ट्राइक) कर सकता है. ईरान का स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर पूरा नियंत्रण है, ऐसे में यदि दोबारा युद्ध की चिंगारी भड़की, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति ठप हो जाएगी और पूरी दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की चपेट में आ जाएगी.