अमेजन जंगल की तबाही: क्या पृथ्वी खो देगी अपना ऑक्सीजन स्रोत?
नई दिल्ली । डेस्क: दुनिया का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय जंगल, अमेजन, जिसे 'पृथ्वी के फेफड़े' के रूप में जाना जाता है, अब अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहा है. यह जंगल पृथ्वी के लिए ऑक्सीजन का एक प्रमुख स्रोत है, जो न केवल मानव जीवन बल्कि समस्त प्राणी जगत के लिए आवश्यक है.
लेकिन बढ़ते वैश्विक तापमान और पर्यावरणीय परिवर्तनों ने इस जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही, तो अमेजन का जंगल ऑक्सीजन उत्पादन में अपनी क्षमता खो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.
लगभग 40 साल पहले पेरू और बोलीविया के शोधकर्ताओं ने अमेजन जंगल पर एक विस्तृत अध्ययन शुरू किया था. उनके अनुसार, उस समय इस जंगल में लगभग 66,000 विभिन्न प्रजातियों के पेड़ और 2,500 प्रजातियों के स्थलीय प्राणी मौजूद थे. इसके अलावा, जल के नीचे 12,000 से अधिक प्रजातियां थीं.
यह जैव-विविधता अमेजन को पृथ्वी का सबसे समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र बनाती थी. लेकिन पिछले चार दशकों में, ग्लोबल वार्मिंग और मानवीय गतिविधियों जैसे जंगल कटाई और खनन ने इस क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है.
वैज्ञानिकों ने पाया कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण अमेजन का प्राकृतिक ठंडा और नम पर्यावरण अब बदल रहा है. इस बदलाव के साथ जंगल के पेड़-पौधे और प्राणी तालमेल नहीं बिठा पा रहे हैं. पेड़, जो पहले बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन का उत्पादन करते थे, अब उस गति से कार्य नहीं कर पा रहे हैं.
इसके अलावा, अमेजन जंगल पृथ्वी से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करने में अत्यधिक कुशल है. लेकिन अगर यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो वायुमंडल में कार्बन की मात्रा बढ़ेगी, जिससे ग्लोबल वार्मिंग और ऑक्सीजन की कमी की समस्या और गंभीर हो जाएगी.
अमेजन में साल के अधिकांश समय भारी बारिश होती है, जो इस जंगल की जीवन रेखा रही है. लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण बारिश का पैटर्न भी अनिश्चित हो गया है. कुछ क्षेत्रों में सूखा बढ़ रहा है, तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है.
इस बदलते मौसम ने पेड़ों की ऑक्सीजन उत्पादन क्षमता को और कम कर दिया है. पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही, तो अगले कुछ वर्षों में पृथ्वी के वायुमंडल में ऑक्सीजन की कमी स्पष्ट रूप से नजर आएगी.
इस संकट का असर केवल ऑक्सीजन की कमी तक सीमित नहीं है. अमेजन के प्राणी, जो इस पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखते हैं, अब खतरे में हैं. कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं, क्योंकि वे इस बदले हुए पर्यावरण के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही हैं. पक्षी, कीट, और अन्य छोटे-बड़े प्राणी, जो इस जंगल की जैव-विविधता का हिस्सा हैं, अब अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
पर्यावरणविदों का मानना है कि अगर अमेजन का पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से बिगड़ गया, तो इसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर जैव-विविधता और जलवायु पर पड़ेगा.
वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि अब समय बहुत कम बचा है. अगर अमेजन को बचाने के लिए तत्काल और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पूरी दुनिया को ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ सकता है.
इसके लिए वैश्विक स्तर पर जंगल कटाई को रोकने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने, और स्थायी विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है. विशेषज्ञों का कहना है कि पृथ्वी पर दूसरा अमेजन जंगल बनाना असंभव है, इसलिए इस अनमोल संसाधन को बचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए.