इंद्रावती नदी जल बटवारे पर बनी सहमति, होगा काम
छत्तीसगढ़ के बस्तर वासियों के लिये इन्द्रावती पानी की समस्या होगी दूर
बस्तर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में बस्तर की जीवन रेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी के जल बटवारे को लेकर ओडिशा सरकार व छत्तीसगढ़ सरकार के बीच नये सिरे से सहमति बन चुकी है.
इसके चलते ओडिशा सरकार ने इंद्रावती जोरा नाला के संगम पर पक्का स्ट्रक्चर निर्माण के लिए मंजूरी दे दी है.
बताया जा रहा है कि करीब 3 करोड़ 49 लाख रुपये की लागत से नदी पर पक्का स्ट्रक्चर बनाया जाएगा.
इसके साथ ही बस्तर की ओर आने वाली नदी की धार में जमे सिल्ट, पत्थर, रेत की बोरियों और मिट्टी को हटाया जाएगा, जिससे नदी में पानी का प्रवाह बढ़ेगा.
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में उड़ीसा की ओर से बस्तर को 40% पानी मिल रहा है.
वहीं स्ट्रक्चर निर्माण होने के बाद दोनों सरकारों में हुए करार के मुताबिक बस्तर को भी 50% पानी मिलने लगेगा.
हालांकि इसके लिए विभाग के अधिकारियों ने निश्चित समय नहीं बताया है.
वर्तमान में बस्तर को मिल रहा 40% पानी
दरअसल गर्मी के मौसम में इंद्रावती नदी में जल संकट गहराने लगता है, इस साल सबसे ज्यादा बुरे हालात रहे हैं.
नदी में पानी नहीं होने की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है.
जिसके चलते बस्तर के सैकड़ों किसान सड़क पर उतर आये और पानी के लिए आंदोलन करने लगे.
इसके बाद देर से ही सही सरकार ने पानी की समस्या को हल करने के लिए अपनी तरफ से प्रयास करना शुरू किया.
उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के बीच हुई मुलाकात और जल संसाधन विभाग के दोनों सचिवों के बीच बातचीत के बाद आखिरकार उड़ीसा सरकार छत्तीसगढ़ को उसके हिस्से का पानी देने के लिए राजी हो गयी.
जानकारी के मुताबिक शुरुआत में गर्मी के मौसम में उड़ीसा सरकार की ओर से केवल 16% पानी बस्तर की ओर पहुंच रहा था, लेकिन वर्तमान में बस्तर को 40% पानी मिल रहा है.
वहीं स्ट्रक्चर निर्माण के बाद आने वाले कुछ महीनों में बस्तर को पूरा 50% पानी मिलने लगेगा.
स्ट्रक्चर निर्माण से जल संकट का निकलेगा समाधान
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता वेद प्रकाश पांडे का कहना है कि पिछले कई सालों से जोरा नाला- इंद्रावती संगम के पास उड़ीसा के किसानों द्वारा बस्तर की ओर आने वाली इंद्रावती नदी में बड़े-बड़े पत्थर, रेत की बोरियों और मिट्टी डालकर प्रवाह कम कर दिया गया था.
साथ ही जोरा नाला की तरफ बहने वाले पानी की धार को रेत की बोरी हटाकर बढ़ा दिया था, जिसके चलते बस्तर वासियों को पानी की समस्या हो रही थी.
लेकिन कुछ महीने पहले ओडिशा सरकार की ओर से बस्तर की ओर आने वाली इंद्रावती नदी में मौजूद रेत की बोरियों को हटाया गया.
जिससे थोड़ी बहुत पानी की धार बढ़ी, लेकिन इससे पूरी तरह से राहत नहीं मिली.
उड़ीसा सरकार करेगी निर्माण
इसका स्थायी समाधान निकालने के लिए 3 करोड़ 49 लाख रुपए की लागत से पक्का स्ट्रक्चर बनाने के लिए मंजूरी दे दी है.
जल्द ही उड़ीसा सरकार में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा स्ट्रक्चर निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा.
इसके अलावा इंद्रावती जोरा नाला के मुहाने पर बने हाइड्रोलिक कंट्रोल स्ट्रक्चर के दोनों ओर जमा रेत, पत्थर, मिट्टी को स्थाई रूप से उड़ीसा सरकार के द्वारा हटाया जाएगा.
अधिकारी ने कहा कि बीते 11 अप्रैल को इंद्रावती में जल का प्रवाह 10 क्यूमेक हो गया है.
जो मार्च के अंतिम सप्ताह में 2 क्यूमेक तक गिर गया था.
अब बस्तर की ओर 3.4 क्यूमेक जल प्रवाहित हो रहा है और लगभग 40प्रतिशत पानी बस्तर को मिल रहा है.किसानों को जल संसाधन विभाग ने दिया आश्वासन
इधर इंद्रावती बचाओ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप का कहना है कि उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के बीच जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद जारी है.
जिसका सबसे ज्यादा नुकसान इंद्रावती नदी के आसपास लगे क्षेत्र में रहने वाले किसानों को उठाना पड़ा है.
हालांकि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने उन्हें भी आश्वासन दिया है कि आगामी साल से किसानों को सिंचाई के लिए इंद्रावती नदी से पर्याप्त पानी मिल सकेगा.
इधर बारिश के चलते इंद्रावती नदी में पानी की धार बढ़ने से कई एनीकटों और स्टॉप डेम में पानी जमा हो रहा है. साथ ही चित्रकोट जलप्रपात की धार भी पहले से बढ़ी है.