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SECL और कोंकण रेलवे में नए रेल कॉरिडोर के लिये समझौता

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01 जून 2026, 09:02 AM 2 मिनट में पढ़ें 3

रेलगाड़ी
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बिलासपुर । संवाददाता: देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कोयला परिवहन को अधिक कुशल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) और कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KRCL) ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कोयला खनन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रेल बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य कोयले की निकासी क्षमता को बढ़ाना, परिवहन बाधाओं को दूर करना और भविष्य के उत्पादन विस्तार को गति देना है.


बिलासपुर स्थित SECL मुख्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में दोनों संगठनों के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे. इस अवसर पर SECL के सीएमडी हरीश दुहान, निदेशक (संचालन और वाणिज्यिक) सुनील गुप्ता, निदेशक (तकनीकी संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (वित्त) डी. सुनील कुमार और महाप्रबंधक (साइडिंग) अशोक कुमार पटनायक सहित कोंकण रेलवे के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित थे. 

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यह परियोजना भारतीय रेलवे के डेवलपमेंट पार्टनर (DP) मॉडल और हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत संचालित की जाएगी, जिसमें कोंकण रेलवे अपने तकनीकी कौशल और बुनियादी ढांचा विकास के अनुभव का योगदान देगा.


इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की पहचान की गई है, जिनमें 52 किलोमीटर लंबी दीपका-गाटोरा रेल लाइन, 37 किलोमीटर लंबा करोंजी-मदन नगर कॉरिडोर (विश्रामपुर की ओर प्रस्तावित विस्तार के साथ) और 14 किलोमीटर लंबी अमलाई-रामपुर बटूरा रेल लाइन शामिल हैं. 


ये नए रेल मार्ग SECL की मौजूदा और आगामी कोयला परियोजनाओं की पूरी उत्पादन क्षमता का दोहन करने में गेम-चेंजर साबित होंगे. इससे देश भर के थर्मल पावर प्लांटों और औद्योगिक उपभोक्ताओं तक कोयले की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी.


वर्तमान में कोयला परिवहन के लिए सड़क मार्ग पर निर्भरता अधिक है, जिससे पर्यावरण और रसद लागत दोनों पर असर पड़ता है. यह नई रेल अवसंरचना सड़क परिवहन पर निर्भरता को कम करेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आएगी और पर्यावरण के अनुकूल माल ढुलाई को बढ़ावा मिलेगा. 


इसके अतिरिक्त, ये रेल कॉरिडोर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के सुदूर और जनजातीय इलाकों में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएंगे. 


भविष्य में इन रूटों पर यात्री सेवाएं शुरू होने की भी संभावना है, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार, बाजार और सामाजिक-आर्थिक विकास के नए रास्ते खुलेंगे. देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच, SECL और KRCL की यह जुगलबंदी भारत के कोयला रसद नेटवर्क को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP