अग्निवीरों की अवधि बढ़ेगी? 'ऑपरेशन सिंदूर' में शानदार प्रदर्शन
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान के खिलाफ मई 2025 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' में अग्निवीरों के शानदार प्रदर्शन ने सेना के शीर्ष स्तर पर उनकी सेवा अवधि बढ़ाने की चर्चा को हवा दी है. सूत्रों के अनुसार, अग्निवीरों की वीरता और दक्षता ने सेना का ध्यान खींचा है, जिसके चलते उनकी चार साल की सेवा अवधि को बढ़ाने और स्थायी नियुक्ति के लिए 25 प्रतिशत की सीमा को बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है.
'अग्निपथ' योजना के तहत 2022 में शुरू हुई इस पहल में 17 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता है. इसके बाद, केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को अगले 11 साल की सेवा के लिए चुना जाता है, जबकि बाकियों को सेवामुक्त कर दिया जाता है.
हालांकि, 'ऑपरेशन सिंदूर' में अग्निवीरों के योगदान ने इस नीति के पुनर्मूल्यांकन की जरूरत को रेखांकित किया है.
सूत्रों के मुताबिक, सेना में अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति का प्रतिशत बढ़ाने पर विचार हो रहा है.
पैदल सेना में 70-75 प्रतिशत, वायु रक्षा और विशेष प्रशिक्षण इकाइयों में 80 प्रतिशत, और विशेष बलों में 100 प्रतिशत अग्निवीरों को बनाए रखने की योजना बनाई जा सकती है. इस कदम का उद्देश्य सेना में युवा और अनुभवी सैनिकों के बीच संतुलन बनाए रखना और औसत आयु को नियंत्रित करना है.
अग्निवीरों का पहला बैच 2026 के अंत तक अपनी चार साल की सेवा पूरी करेगा. तब तक उनकी भविष्य की भूमिका पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है.
सेना के आगामी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय होने की उम्मीद है, जिसके बाद प्रस्ताव को सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा.
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि नौसेना और वायुसेना में भी यही नीति लागू होगी. पिछले साल वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा था कि अग्निवीरों का प्रदर्शन सकारात्मक रहा है और 25 प्रतिशत से अधिक को वायुसेना में जगह दी जा सकती है.