नीदरलैंड के बाद अब नॉर्वे में पीएम मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने पर उठे सवाल
नई दिल्ली । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूरोपीय दौरे के दौरान उनके प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने और मीडिया के लाइव सवालों का जवाब न देने के फैसले पर लगातार दूसरे देश में सवाल उठाए गए हैं. नीदरलैंड के बाद अब नॉर्वे में भी इस मुद्दे को लेकर विदेश मंत्रालय को तीखे सवालों का सामना करना पड़ा.
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने भारत के लोकतांत्रिक रिकॉर्ड का पुरजोर बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत का संविधान देश के सभी नागरिकों को पूर्ण स्वतंत्रता और अधिकार देता है.
ओस्लो में नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोर के साथ संयुक्त प्रेस उपस्थिति के दौरान, 'दागसाविसेन' (Dagsavisen) अखबार की एक नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग स्वेन्ड्स ने पीएम मोदी से सीधे सवाल किया कि वह दुनिया के सबसे स्वतंत्र मीडिया के सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं. बाद में इस पत्रकार ने विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में भी मानवाधिकारों और प्रेस स्वतंत्रता को लेकर तीखे सवाल पूछे.
इन सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और मानवाधिकार रिकॉर्ड का दृढ़ता से बचाव किया. पत्रकार के लहजे और बार-बार के व्यवधान पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक "सभ्यतागत देश" है.
उन्होंने जोर देकर कहा, "हम दुनिया की कुल आबादी का छठा हिस्सा हैं, लेकिन दुनिया की समस्याओं का छठा हिस्सा नहीं हैं. हमारे पास एक मजबूत संविधान है जो लोगों के मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है और देश में महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करता है."
यह इस दौरे पर लगातार दूसरा मौका था जब भारत सरकार को इस नीति पर सवालों का सामना करना पड़ा. इससे पहले शनिवार (17 मई) को नीदरलैंड की यात्रा के दौरान भी डच पत्रकारों ने संयुक्त वक्तव्य के बाद सवाल न लिए जाने पर आपत्ति जताई थी. तब सिबी जॉर्ज ने कहा था कि इस तरह के सवाल केवल पूछने वाले की कम समझ के कारण सामने आते हैं.
विदेश मंत्रालय की शाम की ब्रीफिंग के दौरान जब यह पूछा गया कि क्या मेजबान देशों की सरकारों ने प्रधानमंत्री मोदी से मीडिया के सवालों का सामना करने का अनुरोध किया था, तो सचिव जॉर्ज ने साफ तौर पर इससे इनकार किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरे के प्रभारी विदेश मंत्रालय के सचिव के रूप में मीडिया के सवालों का जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है और वह ऐसा करना जारी रखेंगे. उन्होंने पूरी तरह स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी सरकार ने पीएम मोदी से प्रेस के सामने सवाल-जवाब करने का कोई अनुरोध नहीं किया था.