केवल आधार कार्ड उम्र का पुख्ता सबूत नहीं: HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावों में मुआवजे की गणना को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल आधार कार्ड को किसी व्यक्ति की उम्र का पुख्ता और विश्वसनीय सबूत नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह मुख्य रूप से पहचान का प्रमाण है, जन्मतिथि का नहीं.
हाईकोर्ट के इस फैसले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
उम्र के निर्धारण के लिए विश्वसनीय दस्तावेज: अदालत ने कहा कि मुआवजे का सही निर्धारण करने के लिए आधार कार्ड के बजाय जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल के रिकॉर्ड या प्रमाणित मेडिकल साक्ष्य जैसे कानूनी रूप से स्वीकार्य दस्तावेजों को आधार बनाया जाना चाहिए.
मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी: ट्रिब्यूनल ने एक घायल दावेदार की उम्र केवल आधार कार्ड के आधार पर 68 वर्ष मान ली थी, जिससे उन्हें कम मुआवजा मिला. हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए पाया कि मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार दावेदार की उम्र 60 से 65 वर्ष के बीच थी. इसके बाद अदालत ने मुआवजे की राशि को 96,400 रुपये से बढ़ाकर 3.90 लाख रुपये कर दिया.
बीमा कंपनी की जिम्मेदारी की सीमा: कोर्ट ने साफ किया कि बीमा कंपनी की देयता प्रीमियम जमा होने के समय से नहीं, बल्कि पॉलिसी में दर्ज तारीख और समय से शुरू होती है. यदि प्रीमियम पहले जमा हो गया हो लेकिन पॉलिसी दुर्घटना के बाद प्रभावी हुई हो, तो बीमा कंपनी बीच की अवधि के लिए जिम्मेदार नहीं होगी.
ट्रैफिक उल्लंघन बनाम लापरवाही: अदालत ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि बाइक पर तीन लोग सवार होने मात्र से इसे दावेदार की सह-योगदान लापरवाही मान लिया जाए. कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो कि यातायात नियम का उल्लंघन ही सीधे तौर पर दुर्घटना की वजह बना, तब तक इसे लापरवाही का आधार नहीं बनाया जा सकता.