बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की नई सुबह: CM विष्णु देव साय
जगदलपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज शुक्रवार को जगदलपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की. उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि वर्षों तक हिंसा और भय की छाया में जी रहे 210 माओवादी कैडरों ने 'पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन' कार्यक्रम के अंतर्गत बंदूक छोड़कर संविधान को अपनाने का निर्णय लिया है. उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ में शांति, विश्वास और विकास के नए युग का शुभारंभ बताया.
विशाल आत्मसमर्पण: साय ने कहा कि जो युवा कभी माओवाद की झूठी विचारधारा के जाल में उलझे हुए थे, वे आज लोकतंत्र की शक्ति, संविधान के आदर्शों और राज्य सरकार की संवेदनशील नीतियों पर विश्वास जताते हुए समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं. आत्मसमर्पित कैडरों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य, एक रीजनल कमेटी सदस्य, 22 डिविजनल कमेटी सदस्य, 61 एरिया कमेटी सदस्य और 98 पार्टी सदस्य शामिल हैं. इन पर कुल ₹9 करोड़ 18 लाख का इनाम घोषित था.
हथियारों का जखीरा समर्पित: समारोह में इन 210 माओवादी कैडरों ने कुल 153 हथियार समर्पित किए, जिनमें 19 AK-47, 17 SLR, 23 INSAS राइफलें, एक INSAS LMG, 36 .303 राइफलें, 4 कार्बाइन, 11 BGL लॉन्चर, 41 शॉटगन और एक पिस्तौल शामिल हैं.
'आत्मजागरण की यात्रा' मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर को अपने जीवन के सबसे भावनात्मक और संतोषजनक क्षणों में से एक बताया. उन्होंने कहा, "यह इस बात का प्रमाण है कि बदलाव नीतियों और विश्वास से आता है, भय और हिंसा से नहीं."
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों तथा पुलिस, सुरक्षा बल और नागरिक समाज के समन्वित प्रयास को इस सफलता का श्रेय दिया. उन्होंने इस सामूहिक आत्मसमर्पण को बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास की सबसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि यह हिंसा की जड़ को समाप्त करने की दिशा में निर्णायक कदम है. अब 'अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर, जहाँ कभी भय का शासन था, वहाँ आज विश्वास का शासन है.'
डबल इंजन सरकार का संकल्प: साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त करने की दृढ़ प्रतिज्ञा दोहराई. उन्होंने कहा कि आत्मसमर्पित कैडरों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्धता है, जिसमें उन्हें स्वरोजगार, प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाएंगे.
बस्तर का पुनर्जन्म: मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक घटना सिद्ध करती है कि जब नीतियाँ संवेदनशील और जनकेंद्रित होती हैं, तो सबसे कठिन समस्याएँ भी सुलझाई जा सकती हैं. उन्होंने घोषणा की, "यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि आत्मजागरण की यात्रा है. यह छत्तीसगढ़ की नई पहचान है - शांति, विश्वास और विकास की." उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में बस्तर न केवल नक्सल मुक्त होगा, बल्कि देश के लिए शांति और परिवर्तन का मॉडल बनेगा.
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा, सांसद महेश कश्यप, विधायक किरण सिंह देव समेत पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. मुख्यमंत्री ने 'बंदूक की गूंज' की जगह 'विकास की गूंज' सुनाई देने वाले इस क्षण को बस्तर के इतिहास का पुनर्जन्म बताया.