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समय समाप्त होने के बाद भी बना सकते हैं किसान आईडी कार्ड

छत्तीसगढ़ समय समाप्त, फिर भी बना सकते हैं फॉर्मर आईडी कार्ड

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04 अप्रै. 2025, 09:09 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

फॉर्मर आईडी कार्ड
फॉर्मर आईडी कार्ड

रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के जिन किसानों ने अभी तक फार्मर आईडी कार्ड नहीं बनाया है, उनके लिए राहत भरी खबर है.


तय समय सीमा समाप्त होने के बाद भी सरकार ने इस वेबसाइट को बंद नहीं किया है. पोर्टल अभी भी खुला हुआ है और किसानों का पंजीयन जारी है.


जबकि 31 मार्च अंतिम तारीख निर्धारित किया गया था.


किसानों को तकनीक से जोड़ने के लिए डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा रही है.


यह आईडी एग्रीस्टेक वेबसाइट में तैयार की जा रही है. फार्मर आईडी बनने के बाद किसानों को 11 अंकों का एक यूनिक नंबर दिया जाएगा.


यह नंबर किसानों के आधार से जुड़ा होगा. इसी यूनिक नंबर के आधार पर किसानों की पहचान होगी. साथ ही आगे सरकार की योजनाओं का लाभ भी इस नंबर से मिलेगा.


सरकार द्वारा फार्मर आईडी बनाने के लिए 31 मार्च तक का समय निर्धारित किया गया था. लेकिन इस समय अवधि तक किसानों का पंजीयन पूरा नहीं हो पाया है.


पंजीयन में रायगढ़ पहले नंबर पर

जानकारी के अनुसार प्रदेश में पंजीयन के मामले में रायगढ़ जिला सबसे आगे है. जबकि दूसरे नंबर पर राजनांदगांव जिले का नंबर आता है.


इसी तरह तीसरे नंबर पर बेमेतरा जिला और चौथे नंबर पर धमतरी जिला है.


समय समाप्ति के बाद भी वेबसाइट बंद नहीं होने से विभाग के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है.


राजस्व विभाग, कृषि विभाग सहित अन्य कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी किसान पंजीयन का लक्ष्य पूरा करने में जुट गए हैं. 


अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि शीघ्र की अपना पंजीयन करा लें.


इस पंजीयन के बाद किसी योजना के लिए किसानों को एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सारे दस्तावेजों को इसी पंजीयन से लिया जा सकेगा. 


पंजीयन के लिए चार विकल्प

केंद्र सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित की गई इस योजना के तहत किसानों के पंजीकरण के लिए चार विकल्प दिए गए हैं.

जिसमें किसान खुद भी वेबसाइट के जरिए पंजीयन करा सकते हैं.


इसके अलावा पटवारी और मोबाइल एप के माध्यम से भी रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं.


साथ ही राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से भी अपना पंजीकरण करा सकते हैं.


इसके अलावा सीएससी के ऑपरेटर से भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा.


फौती-बटवारा में नाम नहीं बदलेगा

बताया गया कि जिस्ट्रेशन के पहले जियो रिफ्रेशिंग के माध्यम से किसानों की जमीन के खसरे को यूनिक नंबर दिया जा रहा है.


इसके बाद फॉर्मर आईडी से जियो रिफ्रेशिंग का यूनिक नंबर लिंक हो जाएगा.


फॉर्मर आईडी में नंबर लिंक होते ही किसान का कितना रकबा और उसके कितने हिस्सेदार हैं वो सब दर्ज हो जाएगा.


इसमें यह भी सुविधा दी गई है कि वक्त आने पर फौती कटने या बटवारे की बारी आएगी तो जमीन का नाम बदलने के बजाय यूनिक नंबर के आधार पर दूसरे के नाम पर ट्रांसफर किया जाएगा.


सरकारी योजना के लिए यूनिक नंबर जरूरी

फॉर्मर आईडी बनने के बाद किसानों को यूनिक नंबर दिया जाएगा. इसी यूनिक नंबर के आधार पर किसानों को आगे सरकार की योजनाओं का लाभ मिलेगा.


केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी, उर्वरक अनुदान, प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना, केंद्रीय सरकार प्रणाली के तहत आईसीसीसी, कृषि डीएसएस, एम किसान, पीएमएस, एनपीएसएस, बीज क्रेडिबिलिटी प्रणाली, किसान कॉल सेंटर, राज्य सरकार की योजनाओं के तहत कृषि ऋण योजना, मुख्यमंत्री किसान सहायता योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि मशीनीकरण योजनाओं समेत अन्य योजनाएं भी इसी प्रणाली के अंतर्गत आएंगी.


पंजीयन नहीं होने पर हो सकती है परेशानी

किसानों का पंजीयन नहीं होने पर योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी आ सकती है.


एक बार पंजीयन हो जाने के बाद बार-बार दस्तावेज जमा करने का झंझट भी खत्म हो जाएगा.


आईडी के माध्यम से किसानों का केंद्रीकृत डेटाबेस बनेगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP