पृथ्वी पर लौटीं सुनीता विलियम्स
नई दिल्ली | डेस्कः भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 286 दिनों के बाद पृथ्वी पर वापस लौट आए हैं. भारतीय समयानुसार 19 मार्च को सुबह 3 बजकर 27 मिनट पर उनका यान अमेरिका के फ्लोरिडा में समुद्र तल पर उतरा.
उनके साथ क्रू-9 के दो अन्य एस्ट्रोनॉट निक हेग और अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी वापस आ गए हैं. सुनीता विलियम्स कैप्सूल से बाहर निकलते ही खुशी के साथ सभी का अभिवादन किया.
इस मिशन में नासा के साथ एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा. अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की नासा ने पुष्टि की है.
18 मार्च मंगलवार को ये चारों एस्ट्रोनॉट इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी आईएसएस से पृथ्वी के लिए रवाना हुए थे. जब स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर रहा था. तब उसका तापमान 1650 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो गया था.
इस दौरान लगभग 7 मिनट तक कम्युनिकेशन ब्लैकआउट हो गया था. उन्हें स्पेस स्टेशन से पृथ्वी पर लौटने में 17 घंटे लगे. रूस के सोयूज अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष से वापस लौटने में महज साढ़े तीन घंटे का ही वक्त लगता है.
लेकिन मिशन की सुरक्षा के लिहाज से इतना समय लिया गया. साथ ही धरती पर मौसम का भी विश्लेषण किया गया, उसके बाद ही ड्रैगन समुद्र में उतारा गया.
18 मार्च की सुबह 08:35 बजे स्पेसक्राफ्ट का दरवाजा बंद हुआ. इसके बाद 10:35 बजे स्पेसक्राफ्ट आईएसएस से अलग हुआ. 19 मार्च की सुबह 2:41 बजे डीऑर्बिट बर्न शुरू हुआ. यानी, कक्षा से उल्टी दिशा में स्पेसक्राफ्ट का इंजन फायर किया गया.
इससे स्पेसक्राफ्ट की पृथ्वी के वातावरण में एंट्री हुई और सुबह 3:27 बजे फ्लोरिडा के तट पर समुद्र में लैंडिंग कराई गई. इससे पहले यान धरती की 18 हजार फीट की ऊंचाई पर पहुंचा.
सबसे पहले दो ड्रैगन पैराशूट खुले और उसके बाद 6000 फीट की ऊंचाई पर मेन पैराशूट ओपन हुआ. जिससे ड्रैगन की पानी में कम स्पीड में लैंडिंग हुई. तापमान सामान्य होने के बाद कैप्सूल को खोला गया.
क्रू ड्रैगन कैप्सूल से बाहर निकाले गए और उन्हें स्ट्रेचर पर ले जाया गया. अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने के कारण अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर पर असर होता है. कमजोर मांसपेशियों की वजह से चल नहीं पाने के चलते एस्ट्रोनॉट को स्ट्रेचर पर ले जाने का प्रोटोकॉल है.
सुनीता और बुच को फिलहाल ह्यूस्टन में जॉनसन स्पेस सेंटर ले जाया गया है. जहां कुछ दिनों तक स्वास्थ्य जांच के लिए रहेंगे. इसके बाद दोनों को घर जाने की इजाजत दी जा सकती है.
क्योंकि माइक्रोग्रैविटी में लंबे समय तक रहने के बाद दोबारा धरती पर वापस लौटने पर अंतरिक्ष यात्रियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. इस दौरान थकान, चलने में कठिनाई और शरीर का संतुलन बनाए रखने में समस्या हो सकती है.
8 दिन के लिए गए थे 9 महीने बाद लौटे
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग और नासा के 8 दिन के जॉइंट ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ पर गए थे.
इस मिशन का उद्देश्य बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन तक ले जाकर वापस लाने की क्षमता को टेस्ट करना था.
एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन पर 8 दिन में रिसर्च और कई एक्सपेरिमेंट भी करने थे, लेकिन थ्रस्टर में आई गड़बड़ी के बाद उनका 8 दिन का मिशन 9 महीने से ज्यादा समय का हो गया था.
सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में कुल 606 दिन बिता चुकी हैं. इसके साथ ही अंतरिक्ष में सबसे लंबा समय गुजराने वाले अंतरिक्षयात्रियों में सुनीता विलियम्स दूसरे स्थान पर पहुंच गई हैं.
इस मिशन में ही सुनीता विलियम्स ने 286 दिन लगातार अंतरिक्ष में गुजारकर इतिहास रच दिया. सुनीता विलियम्स ने चार बार स्पेसवॉक किया.
नासा ने जारी किया बयान
नासा ने बयान जारी कर कहा है कि सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी का मिशन सफल रहा. इसके लिए हम नासा की पूरी टीम की सराहना करते हैं.
नासा ने इस दौरान सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की तारीफ भी की.
अंतरिक्ष यात्री हेग ने कैलिफोर्निया के हॉथोर्न में स्पेसएक्स फ्लाइट कंट्रोलर्स को रेडियो पर कहा- क्या शानदार सफर था. मैं एक कैप्सूल देख रहा हूं और मैं बेहद खुश हूं.
सुनीता की वापसी पर परिवार में खुशी
सुनीता विलियम्स के सकुशल धरती पर लौटने पर भारत में सुनीता के परिवार में खुशी का माहौल है. सुनीता विलियम्स के चचेरे भाई दिनेश रावल ने कहा कि 'जब वे सुरक्षित लौटीं तो हम खुशी से उछल पड़े.
मैं बहुत खुश था. कल से ही हम परेशान थे, लेकिन भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली और सुनीता सुरक्षित धरती पर लौट आईं. सुनीता कोई आम महिला नहीं है बल्कि वह दुनिया बदलेगी.