कर्रेगुट्टा पहाड़ पर जवानों का कब्जा, फहराया तिरंगा
बीजापुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों में जारी एंटी नक्सल ऑपरेशन में जवानों को बड़ी सफलता मिल रही है. दावा है कि जवानों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित ठिकाने पर कब्जा कर लिया है.
डीआरजी, बस्तर फाइटर, एसटीएफ और कोबरा के जवान पहली बार गलगम, पुजारी कांकेर और कर्रेगुट्टा की पहाड़ियों पर पहुंचे हैं.
जवानों ने कड़ी मशक्कत करते हुए 9 दिनों में करीब 5 हजार फीट खड़ी पहाड़ की चढ़ाई की और यहां तक पहुंचे.
जवानों ने नीलम सराय, धोबे की पहाड़ी के बाद अब कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है. जवानों ने बकायदा यहां पहुंचकर देश का तिरंगा लहराया है.
छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के बीच मौजूद बीजापुर के कर्रेगुट्टा और गलगम के इलाकों को माओवादियों का सबसे सुरक्षित जगह माना जाता रहा है.
इस इलाके में बड़े माओवादियों की मौजूदगी की लगातार सूचना पुलिस को मिल रही थी. 9 दिन पहले 5 हजार से अधिक जवानों को इस इलाके में सर्च ऑपरेशन के लिए भेजा गया.
इस दौरान गलगम की पहाड़ियों में माओवादियों के साथ जवानों की मुठभेड़ हुई. इस मुठभेड़ में जवानों ने तीन महिला माओवादियों को मार गिराया.
ये पीएलजीए बटालियन नंबर-1 की सदस्य थीं. इन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था. दो दिन पूर्व ही मारे गए तीनों माओवादियों की शिनाख्त की गई.
इस मुठभेड़ के बाद जवान आगे बढ़ते चले गए. शनिवार को सबसे पहले जवानों ने गलगम की पहाड़ियों पर कब्जा किया.
इसके बाद रविवार को इसी पहाड़ी पर मौजूद जवानों को एक सुरंगनुमा गुफा मिला.
कई जवानों की तबीयत बिगड़ी
इसके बाद जवान आगे बढ़ते चले गए. हालांकि इस बीच कई जवानों की तबीयत बिगड़ने लगी. यह भी पहला मौका था जब इस बीहड़ इलाके में वायुसेना की एमआई- 17 हेलीकॉप्टर को उतारा गया.
यहां जवानों को वो सारे संसाधन हेलीकॉप्टर की मदद से उपलब्ध कराए गए जिससे कि जवान इस इलाके को घेरने में सफल हो सके.
बकायदा हेलीकॉप्टर की मदद से ही जिन जवानों की तबीयत बिगड़ी उन्हें बीजापुर ले जाया गया और अन्य जवानों को हेलीकॉप्टर की मदद से यहां उतार गया.
इस दौरान हेलीकॉप्टर की सुरक्षा के लिए भी जवान चारों तरफ पहरा देने में लगे हुए थे.
3 पहाड़ियों पर अब जवानों का कब्जा
गलगम की पहाड़ी और गुफा को कब्जा में लेने के बाद जवान यहीं से करीब 25 से 30 किलोमीटर की खड़ी पहाड़ चढ़कर नीलम सराय की पहाड़ी पर पहुंचे.
नीलम सराय की पहाड़ी बीजापुर और तेलंगाना की सीमा पर मौजूद सबसे ऊंची चोटी में से एक है.
जवानों ने यहां एक छोटा सा अस्थाई कैंप स्थापित किया है और नीलम सराय के पहाड़ को भी अपने कब्जे में ले लिया.
सुरक्षा बल के जवान अब यहीं से सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इसके बाद मंगलवार की सुबह जवानों ने धोबे की पहाड़ी पर भी अपना कब्जा जमा लिया.
बताया जा रहा है कि धोबे तेलंगाना और बीजापुर का बॉर्डर है. धोबे का अधिकांश इलाका तेलंगाना में आता है.
यहां भी जवान पहाड़ में मैदानी क्षेत्र देखकर हेलीकॉप्टर को उतरने में पूरी सुरक्षा दी. यहां भी हेलीकॉप्टर से अतिरिक्त सुरक्षा बल पहुंचे. यहां भी एक छोटा सा अस्थाई कैंप खोला गया है.
हेलीकॉप्टर से उतारा गया अतिरिक्त फोर्स
बुधवार की दोपहर जवानों ने माओवादियों की पहाड़ी कहे जाने वाले कर्रेगुट्टा में भी अपना कब्जा जमा लिया.
सुरक्षा बलों ने बकायदा यहां तिरंगा भी लहराया. अब यहां लगातार हेलीकॉप्टर से अतिरिक्त फोर्स को उतारा जा रहा है.
जवान धीरे-धीरे इस इलाके को भी अपने कब्जे में करने की पूरी तैयारी में हैं. हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से अब आगे की रणनीति पुलिस के द्वारा नहीं बताई जा रही है.
लेकिन माना जा रहा है कि माओवादियों का सबसे सुरक्षितगढ़ माने जाने वाला नीलमसराय, धोबे और कर्रेगुट्टा की पहाड़ी अब जवानों के कब्जे में हैं.
फिलहाल अभी इस इलाके में माओवादियों की मौजूदगी है या नहीं, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है.