विधायक देवेन्द्र यादव जेल से रिहा
छत्तीसगढ़ के विधायक देवेन्द्र यादव जेल से रिहा
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार हिंसा मामले में जेल में बंद विधायक देवेन्द्र यादव शुक्रवार शाम को जेल से रिहा हुए.
जेल से निकलते ही कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए विधायक देवेन्द्र यादव ने कहा कि मुझे साजिश के तहत फंसाया गया था.
मुझे सतनामी समाज की अभिव्यक्ति का समर्थन करने के चलते जेल भेजा गया मैं अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन करता रहूंगा.
उन्होंने राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे भी लगाये. उनके संबोधन के बाद एक रैली की शक्ल में उनका काफिला शहर की तरफ बढ़ गया.
देवेन्द्र यादव 7 महीने बाद जेल से बाहर निकले हैं. उनके समर्थक आज दोपहर से ही रायपुर सेन्ट्रल जेल के बाहर अपने विधायक के स्वागत में इकट्ठा हो गए थे.
देवेन्द्र यादव के जेल से बाहर निकलने के पहले ही नारेबाजी और आतिशबाजी का दौर शुरू हो गया था.
इस दौरान सेन्ट्रल जेल के बाहर कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ ही विधायक देवेंद्र यादव के परिवार वाले भी मौजूद रहे.
जेल के बाहर समर्थकों का हुजूम देवेन्द्र यादव के समर्थन में जमकर नारेबाजी करते हुए उनके बाहर आते ही इतना उतावला हो गया कि देवेन्द्र यादव के निकलते ही बैरिकेटिंग को गिरा दिया गया.
इस दौरान कुछ लोग जमीन पर गिर गये लेकिन गनीमत रही कि कोई चोटिल नहीं हुआ.
समर्थकों को काबू में करने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी.
भिलाई विधायक देवेंद्र यादव को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है. वे पिछले साल 17 अगस्त से जेल में बंद थे.
देवेन्द्र यादव कल ही जेल से बाहर जा जाते, लेकिन कागजी कार्रवाई समय पर पूरी नहीं होने के कारण वह बाहर नहीं आ पाए.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जमानत की प्रक्रिया बलौदाबाजार जिला सत्र न्यायालय में पूरी की गई.
इसके बाद रिहाई आदेश की कॉपी को देंवेंद्र यादव के वकील ने रायपुर सेंट्रल जेल में प्रस्तुत किया.
जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया. वहीं भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश चतुर्वेदी समेत 112 लोगों को भी हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है.
क्या था मामला
पिछले साल 15 मई 2024 की रात बलौदा बाज़ार ज़िले के गिरौधपुरी से लगे एक इलाके में धार्मिक प्रतीक जैतखाम को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था.
इसके विरोध में 10 जून को सतनामी समाज के हजारों लोग कलेक्टोरेट के पास दशहरा मैदान में प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे.
जैतखाम क्षतिग्रस्त करने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन लोगों का आरोप था कि पकड़े गए लोग असली आरोपी नहीं हैं.
पुलिस जानबूझकर दोषियों को बचा रही है.
इसी बात को लेकर 10 जून को प्रदर्शन हुआ, जिसमें उग्र भीड़ ने कलेक्टर, एसपी, पंचायत कार्यालय समेत कई सरकारी कार्यालयों और वाहनों में आग लगा दी थी.
इसके बाद ज़िले के कलेक्टर और एसपी का तबादला कर दिया गया था. बाद में दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया.
देवेंद्र यादव के ख़िलाफ़ आरोप है कि उन्होंने आग लगाने वाली भीड़ को भड़काने का काम किया था.