समय पर उठाव नहीं होने से भीगा लाखों क्विंटल धान
छत्तीसगढ़ समय पर उठाव नहीं होने से भीगा लाखों क्विंटल धान
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ में मार्च के महीने में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने धान खरीदी केन्द्रों की मुश्किलें बढ़ा दी है. शुक्रवार को प्रदेश के कई जिलों में हुई बारिश से सरकारी धान खरीदी केंद्रों में खुले में रखा धान भीग गया है.
समय पर धान का उठाव नहीं होने से पहले ही सूखत की समस्या से जूझ रही समितियों को अब दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. प्रदेश में 31 जनवरी तक धान खरीदी की गई. धान खरीदी बंद हुए दो माह होने में कुछ दिन ही बाकी है. उसके बाद भी समितियों से धान का उठाव नहीं हुआ है.
समितियों में धूप और बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त साधन नहीं होने से धान खुले में पड़े हैं. प्रदेश के महासमुंद जिले के ही उपार्जन केन्द्रों में 5 लाख क्विंटल से अधिक धान खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है.
हालांकि शुक्रवार को जिले में अधिक बारिश नहीं हुई. कहीं-कहीं हल्की बारिश हुई है. लेकिन शनिवार को भी मौसम विभाग ने बारिश होने की संभावना व्यक्त की है. यदि तेज बारिश हुई तो धान को नुकसान हो सकता है.
महासमुंद में 5 लाख क्विंटल धान नहीं उठा
महासमुंद कलेक्टर ने पिछले दिनों ही 13 मार्च तक बचे हुए धान का उठाव करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद भी अब तक उठाव पूर्ण नहीं हुआ है.
जिले में कुल 110 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी. अब तक 105 लाख क्विंटल धान का उठाव हो चुका है.
अभी भी जिले के अलग-अलग समितियों में 5 लाख क्विंटल धान रखा हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार जिले के कोमाखान क्षेत्र के आस-पास की समितियों में धान का उठाव अभी तक नहीं हुआ है.
परिवहन धीमी गति से होने के कारण यहां धान नहीं उठ पाया है. कल अचानक मौसम खराब हुआ तो आनन-फानन में यहां के कर्मचारियों द्वारा तिरपाल से धान को ढंका गया.
समिति के कर्मचारियों का कहना है कि शेड नहीं होने से धान को बचाना काफी मुश्किल होता है.
समिति में जो तिरपाल हैं वह भी कटे-फटे हुए हैं. वहीं तेज हवा चलने से तिरपाल उड़ भी जाते हैं. जिससे धान भीग जाता है.
भानुप्रतापपुर में भीग गया धान
इसी प्रकार प्रदेश के भानुप्रतापपुर क्षेत्र के कई केंद्रों में शुक्रवार को हुई बारिश से धान भीग गया है.
यहां के केंवटी धान खरीदी केंद्र में 55 हजार क्विंटल धान खरीदी हुई है. इसमें महज 15 हजार क्विंटल ही उठाव हुआ है. अभी भी समिति में 40 हजार क्विंटल धान जाम है. यही हाल यहां के सभी धान खरीदी केंद्रों का है.
जबकि धान का उठाव नियमानुसार खरीदी के 72 घंटे में होना चाहिए.
राजनांदगांव में 13 लाख क्विंटल धान जाम
यही हाल राजनांदगांव जिले का भी है. जिले की समितियों में अभी लाखों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे रखा हुआ है.
बार-बार नोटिस के बाद भी संबंधित विभाग द्वारा धान का उठाव नहीं किया जा रहा है. पहले से ही परेशान समिति प्रबंधकों की मौसम बदलने से परेशान और बढ़ गई है.
इस बार राजनांदगांव जिले में 70 लाख क्विंटल से अधिक की धान खरीदी की गई थी. समय पर धान का उठाव नहीं होने से अभी भी 13 लाख क्विंटल धान शेष पड़ा हुआ है.
जिला मुख्यालय से लगी अधिकांश सोसायटियों में ही हजारों क्विंटल धान जाम हुआ है.
समितियों में धान का भौतिक सत्यापन हुआ तो सूखत का हर्जाना भी समिति प्रबंधकों को भरना पड़ेगा.