अमेरिका और ईरान शांति समझौते की मुख्य बातें
वाशिंगटन/तेहरान । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच एक बड़ा और ऐतिहासिक समझौता संपन्न हो गया है. दोनों देशों के बीच हुए इस महत्वपूर्ण समझौते (MOU) के बाद लंबे समय से जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों पर विराम लगने की उम्मीद जताई जा रही है.
एक अमेरिकी अधिकारी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस समझौते पर दोनों देशों ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर कर दिए हैं. हालांकि, अभी तक दोनों में से किसी भी देश ने इसका भौतिक दस्तावेज़ (फिजिकल कॉपी) जारी नहीं किया है और ईरानी अधिकारियों ने भी अमेरिकी पक्ष द्वारा पेश किए गए इस मसौदे की पूरी तरह पुष्टि नहीं की है.
आइए जानते हैं कि इस वृहद शांति समझौते में कौन-कौन सी मुख्य बातें शामिल हैं:
पॉइंट 1: युद्ध का तत्काल अंत और लेबनान की संप्रभुता
इस समझौते के लागू होते ही अमेरिका, ईरान और युद्ध में शामिल उनके सभी सहयोगी दल तत्काल प्रभाव से सैन्य अभियानों को स्थायी रूप से रोकने की घोषणा करते हैं. इसके तहत लेबनान सहित सभी मोर्चों पर जारी लड़ाई को तुरंत रोक दिया जाएगा. दोनों पक्षों ने संकल्प लिया है कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ न तो युद्ध शुरू करेंगे, न ही बल या धमकी का प्रयोग करेंगे. साथ ही, लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को सुनिश्चित किया जाएगा.
पॉइंट 2: आपसी संप्रभुता का सम्मान और आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप
अमेरिका और ईरान ने आधिकारिक तौर पर एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरा सम्मान करने की प्रतिबद्धता जताई है. इसके साथ ही दोनों देशों ने यह वचन दिया है कि वे भविष्य में एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करेंगे.
पॉइंट 3: अंतिम समझौते के लिए 60 दिनों की समय-सीमा
दोनों देश इस प्रारंभिक समझौते (MOU) के बाद अगले अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम और पूर्ण समझौते पर बातचीत करके उसे हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हुए हैं. यदि आवश्यकता पड़ी, तो इस समय-सीमा को आपसी सहमति से आगे भी बढ़ाया जा सकेगा.
पॉइंट 4: अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की समाप्ति और सैन्य वापसी
समझौते पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ की गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर देगा, जिसे 30 दिनों के भीतर पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा. इस अवधि में व्यापारिक जहाजों का आवागमन युद्ध-पूर्व स्थिति की तरह सामान्य किया जाएगा. इसके अतिरिक्त, अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर अमेरिका ईरान के नजदीकी क्षेत्रों से अपने सैन्य बलों को भी हटा लेगा.
पॉइंट 5: होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित और मुफ्त समुद्री आवागमन
ईरान अपनी ओर से फारस की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित और मुफ्त आवागमन के लिए 60 दिनों तक हर संभव प्रयास करेगा. समुद्री रास्ते से सैन्य बाधाओं और बारूदी सुरंगों को हटाने का काम 30 दिनों में पूरा कर लिया जाएगा. इसके साथ ही, ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों और तटीय राज्यों के संप्रभु अधिकारों के दायरे में रहकर होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन के लिए ओमान और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ बातचीत शुरू करेगा.
पॉइंट 6: $300 अरब का भारी-भरकम पुनर्निर्माण फंड
अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर की एक योजना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हुआ है. इस वित्तीय सहायता और निवेश योजना के क्रियान्वयन तंत्र को 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के हिस्से के रूप में तय किया जाएगा, और इसके लिए जरूरी सभी वित्तीय लाइसेंस और मंजूरियां अमेरिका द्वारा दी जाएंगी.
पॉइंट 7: सभी प्रकार के अमेरिकी और वैश्विक प्रतिबंधों का खात्मा
अमेरिका, ईरान के खिलाफ लगाए गए सभी प्रकार के प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए सहमत हुआ है. इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव, आईएईए (IAEA) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव और अमेरिका के सभी एकतरफा प्राथमिक व माध्यमिक प्रतिबंध शामिल हैं. इन्हें हटाने का एक निश्चित शेड्यूल अंतिम समझौते में तय किया जाएगा.
पॉइंट 8: परमाणु कार्यक्रम की सीमा और यूरेनियम का निपटारा
ईरान ने एक बार फिर दृढ़ता से दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा. दोनों देश ईरान के पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री (Enriched Material) के निपटारे के लिए सहमत हुए हैं, जिसके तहत आईएईए (IAEA) की निगरानी में ऑन-साइट डाउन-ब्लेंडिंग (सामग्री को कम समृद्ध करना) की जाएगी. अंतिम समझौते में ईरान की परमाणु जरूरतों और संवर्धन के मुद्दे पर एक संतोषजनक ढांचा तैयार किया जाएगा.
पॉइंट 9: बातचीत के दौरान यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखना
जब तक दोनों देश अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच जाते, तब तक क्षेत्र में वर्तमान स्थिति (यथास्थिति) को बनाए रखा जाएगा. इसका अर्थ यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को मौजूदा स्तर पर ही रोक कर रखेगा, और बदले में अमेरिका इस दौरान कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही मध्य पूर्व क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती करेगा.
पॉइंट 10: ईरानी कच्चे तेल के निर्यात के लिए तत्काल अमेरिकी छूट
इस प्रारंभिक समझौते के लागू होते ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान के कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़े डेरिवेटिव्स के निर्यात के लिए तुरंत आवश्यक छूट (Waivers) जारी करेगा. इसमें तेल व्यापार से जुड़ी सभी बैंकिंग सेवाएं, बीमा और परिवहन सेवाएं भी शामिल होंगी ताकि ईरान का व्यापार तुरंत बहाल हो सके.
पॉइंट 11: फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों की पूरी तरह वापसी
अमेरिका अंतरराष्ट्रीय बैंकों और खातों में फ्रीज की गई ईरान की सभी संपत्तियों और फंड को पूरी तरह से रिलीज करने के लिए प्रतिबद्ध हुआ है. इस पैसे को जारी करने की प्रक्रियाओं पर बातचीत के दौरान सहमति बनाई जाएगी. सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान द्वारा नामित किसी भी लाभार्थी को भुगतान करने के लिए इन फंडों का पूरा उपयोग किया जा सकेगा और अमेरिका इसके लिए सभी आवश्यक लाइसेंस जारी करेगा.
पॉइंट 12: कार्यान्वयन के लिए कार्यकारी निगरानी तंत्र की स्थापना
इस प्रारंभिक शांति समझौते (MOU) के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने और भविष्य में होने वाले अंतिम समझौते के नियमों का पूरी तरह पालन करवाने के लिए दोनों देश मिलकर एक संयुक्त कार्यकारी निगरानी तंत्र (Executive Mechanism) स्थापित करेंगे.
पॉइंट 13: चुनिंदा मुद्दों पर आगे की बातचीत की रूपरेखा
इस प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, जैसे ही पॉइंट 1, 4, 5, 10 और 11 (यानी युद्ध विराम, नाकेबंदी हटाना, समुद्री रास्ता खोलना, तेल छूट और फंड की रिलीज) को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, दोनों देश इसके निरंतर क्रियान्वयन को देखते हुए विशेष रूप से बाकी बचे हुए अन्य बिंदुओं पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत को आगे बढ़ाएंगे.
पॉइंट 14: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की कानूनी मुहर
इस पूरे शांति समझौते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह सुरक्षित, कानूनी रूप से मजबूत और दोनों पक्षों के लिए बाध्यकारी बनाने के लिए, अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक औपचारिक प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित और समर्थित किया जाएगा.