खाद की किल्लत के बीच 60 हजार टन यूरिया स्वीकृत
रायपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के किसान लगातार खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं. इस समय धान के खेतों में छिड़काव के लिए यूरिया की सख्त जरूरत है. इसके लिए किसान लगातार सरकार से मांग करते हुए प्रदर्शन भी कर रहे हैं.
खबर है कि केन्द्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है. इसमें सितंबर माह के प्रथम सप्ताह में 20 हजार टन, दूसरे सप्ताह में 35 हजार टन और शेष 5 हजार टन की आपूर्ति माह के अंत तक किया जाएगा.
मार्कफेड अधिकारियों का दावा है कि चालू खरीफ सीजन में 28 अगस्त की स्थिति में कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है. जिसमें सहकारी गोदामों में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन और निजी दुकानों में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन है.
इनमें से 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है. 3 लाख 42 हजार 444 मीट्रिक टन सहकारी और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी दुकानों से वितरण किया गया है.
विभाग के मुताबिक यह आंकड़ा पिछले वर्ष इसी अवधि से अधिक है. इसके अलावा 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल नैनो यूरिया का भी भंडारण किया गया है.
जिसमें सहकारी गोदामों में 1 लाख 78 हजार 919 और निजी दुकानों में 1 लाख 12 हजार 140 बॉटल भंडारण हुआ है. इनमें से सहकारी सोसाइटियों से 1 लाख 58 हजार 809 और निजी दुकानों से 79 हजार 810 बॉटल नैनो डीएपी संग्रहित किया गया है.
अब तक किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल नैनो यूरिया और 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल नैनो डीएपी वितरित किया जा चुका है.
बताया गया कि खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार ने 14.62 लाख टन रासायनिक खाद का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके विरुद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख टन का भंडारण कर लिया गया है. भंडारण के आधार पर किसानों को अब तक 13.19 लाख टन खाद वितरित किया गया है.
कृषि मंत्री रामविचार नेताम और राज्य के सांसदों ने पिछले दिनों केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा से भेंट कर छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए अतिरिक्त खाद की मांग की थी. जिसके बाद 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया गया है.
266 का यूरिया 800 में
सहकारी गोदामों में यूरिया नहीं मिलने के चलते किसान बाजार का रूख करते हैं. हालात ये है कि 266 रुपए के मूल्य का यूरिया 700 से 800 रुपए में निजी व्यपारी बेचते हैं.
इसके बावजूद खाद की इतनी किल्लत है कि बढ़ी हुई कीमत पर भी किसान को भटकना पड़ रहा है. सहकारी समितियों में मांग के अनुरूप खाद नहीं पहुंच रहा है.
कई दिन इंतजार करने के बाद कुछ समितियों में पिछले दिनों बड़ी मुश्किल से 100 से 200 बोरी खाद पहुंचा था.
पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर प्रत्येक किसानों को मात्र एक-एक- दो-दो बोरी खाद का वितरण किया गया था.
कुछ ही घंटों में खाद खत्म हो गया था. बाद में आने वाले किसानों का मायूस होकर लौटना पड़ा था.