40 साल तक गर्भ में पत्थर बन चुका था भ्रूण
कोलकाता । डेस्क: कई बार ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं जो हमें आश्चर्यचकित कर देती हैं. विज्ञान के सहारे हम भले ही दुनिया के रहस्यों को सुलझाने की कोशिश करें, लेकिन आज भी कुछ ऐसी घटनाएँ होती हैं जिन पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता. हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें वायरल हुई हैं, जिनमें दावा किया गया है कि 74 साल की एक महिला के पेट में 40 साल पहले मृत भ्रूण पत्थर में बदल गया था.
डॉक्टरों का कहना है कि जब मृत भ्रूण शरीर में लंबे समय तक रहता है और उसके चारों ओर कैल्शियम जमकर उसे पत्थर की तरह सख्त कर देता है, तो इसे चिकित्सा विज्ञान में 'लिथोपेडियन' या 'स्टोन बेबी' कहा जाता है.
इस खबर के वायरल होने के बाद कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर एक भ्रूण पत्थर में बदलकर शरीर में कैसे रह सकता है? वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक बेहद दुर्लभ स्थिति है, जिसमें भ्रूण गर्भाशय के बजाय पेट में बढ़ने लगता है. अगर भ्रूण को पर्याप्त रक्त संचार नहीं मिलता, तो वह मर जाता है. इसके बाद शरीर इसे 'विदेशी वस्तु' मानकर इसके चारों ओर कैल्शियम जमा करना शुरू कर देता है.
डॉक्टरों के अनुसार, लिथोपेडियन की स्थिति में शरीर मृत भ्रूण को बाहर निकालने में असमर्थ होता है और अपनी रक्षा प्रक्रिया को सक्रिय करता है. इससे भ्रूण के चारों ओर कैल्शियम की परत बनने लगती है, जो धीरे-धीरे उसे पत्थर में बदल देती है.
2013 में भी सामने आया था ऐसा मामला
यह घटना 2013 में सामने आई थी, जब कोलंबिया की 82 वर्षीय एक महिला के पेट में 40 साल से मौजूद 'स्टोन बेबी' का पता चला था. यूनाइटेड स्टेट्स के केस मेडिकल सेंटर की गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. किम गार्सी ने बताया, "यह स्थिति इतनी दुर्लभ है कि मेडिकल साइंस में अब तक केवल 300 ऐसे मामले ही दर्ज किए गए हैं."
'लिथोपेडियन' आमतौर पर तब पता चलता है, जब कोई महिला पेट दर्द या असुविधा के कारण एक्स-रे, सीटी स्कैन या अल्ट्रासाउंड करवाती है. ज्यादातर मामलों में यह कई साल बाद, खासकर बुढ़ापे में अचानक बीमारी के कारण पता चलता है.
उक्त मामले में, महिला ने लगभग 35 साल पहले गर्भधारण किया था. सात महीने बाद शिशु का विकास रुक गया था, लेकिन भ्रूण उनके पेट में ही रह गया. उस समय भ्रूण का वजन 2 किलो था. समय के साथ यह भ्रूण कैल्सीफाइड होकर पत्थर में बदल गया.
चिकित्सकों के अनुसार, इस स्थिति ने संभवतः महिला की जान बचाई, क्योंकि अगर भ्रूण पत्थर में न बदला होता, तो उनके पेट में संक्रमण हो सकता था. हैरानी की बात यह है कि इतने सालों तक इस पत्थर बने भ्रूण के कारण महिला को कोई परेशानी नहीं हुई.