लेबनान में 'सीजफायर' के बीच 25 दिनों में 111 बच्चें हताहत
बेरूत । डेस्क: लेबनान और इजरायल के बीच पिछले महीने घोषित युद्धविराम के बावजूद जमीनी हकीकत भयावह बनी हुई है. वैश्विक चैरिटी संस्था 'सेव द चिल्ड्रन' की ताजा रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि 16 अप्रैल को प्रभावी हुए युद्धविराम के पहले 25 दिनों में लेबनान में हर दिन औसतन 4 से अधिक बच्चे मारे गए या घायल हुए हैं.
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अस्थायी संघर्षविराम की अवधि के दौरान कम से कम 22 बच्चों की जान जा चुकी है और 89 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
यह आंकड़े दर्शाते हैं कि औपचारिक घोषणा के बाद भी बच्चों के लिए हिंसा का खतरा कम नहीं हुआ है. 2 मार्च से शुरू हुई शत्रुता के बाद से अब तक लेबनान में लगभग 200 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कुल मृतकों की संख्या 2,900 के करीब पहुंच गई है.
इजरायल का दावा है कि उसकी वायुसेना ने अप्रैल के मध्य से अब तक लेबनान में 1,100 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है, जिन्हें वे हिजबुल्लाह से संबंधित बता रहे हैं.
हालांकि, सेव द चिल्ड्रन की लेबनान निदेशक नोरा इंगदाल का कहना है कि नागरिकों पर हमले थमे नहीं हैं, बल्कि वे एक नए नाम के तहत जारी हैं.
इस युद्ध के कारण 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं. वर्तमान में लगभग 1.25 लाख लोग सामूहिक आश्रयों में रहने को मजबूर हैं, जिनमें 44,800 बच्चे शामिल हैं.
इन आश्रयों में अत्यधिक भीड़ और स्वच्छता सुविधाओं के अभाव के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. दक्षिण लेबनान से विस्थापित 10 वर्षीय ताला जैसी मासूमों की घर लौटने और स्कूल जाने की इच्छा अब भी अधूरी है.
इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें गुरुवार और शुक्रवार को वाशिंगटन डीसी में होने वाली सीधी शांति वार्ता पर टिकी हैं. जहां दोनों देश हिजबुल्लाह को निहत्थे करने की प्रतिबद्धता जता रहे हैं, वहीं हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका शस्त्रागार बातचीत का हिस्सा नहीं होगा.