1.5 करोड़ की रिश्वत का मामला: DGP ने दिल्ली कोर्ट को सौंपी जांच रिपोर्ट
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ पुलिस के महानिदेशक अरुण देव गौतम ने एक बहु-करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले को दबाने के लिए रिश्वत लेने के आरोपों पर दिल्ली की एक अदालत में अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है. इस मामले में 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल और दो अन्य पुलिसकर्मियों पर जांच का रुख मोड़ने के बदले 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने और 1 करोड़ रुपये हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है.
वहीं, सीबीआई अदालत इस पूरे मामले की सुनवाई कर रही है, हालांकि आईपीएस राहुल बंसल ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया है और कहा है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है.
यह पूरा विवाद पिछले साल छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर साइबर पुलिस स्टेशन में दर्ज 21.15 लाख रुपये की साइबर ठगी की शिकायत से शुरू हुआ था. एक पीड़ित ने दो फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए 84 ट्रांजैक्शन में भारी रकम गंवाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.
शुरुआती जांच का नेतृत्व कर रहे आईपीएस बंसल की टीम ने इस मामले में 23 लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की थी. हालांकि, पीड़ित का आरोप है कि छत्तीसगढ़ पुलिस और सीबीआई द्वारा रिश्वत की शिकायत पर कार्रवाई न किए जाने के बाद उसे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने खुलासा किया कि यह सिर्फ स्थानीय ठगी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला एक बड़ा साइबर-फ्रॉड सिंडिकेट है. सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा के अनुसार, यह गिरोह 38 फर्जी ट्रेडिंग पोर्टल्स के जरिए लगभग 19,340 लोगों को निशाना बना चुका है.
जांचकर्ताओं ने पाया कि गिरोह ने फर्जी बैंक खातों, फिनटेक पेमेंट गेटवे, हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशों में पैसे भेजे. सिर्फ दो पोर्टल्स के विश्लेषण से ही चार महीनों के भीतर 1,880 करोड़ रुपये से अधिक के क्रिप्टोकरेंसी लेन-देन का पता चला है, जबकि एक जांच लेजर में दो महीने से भी कम समय में 601.90 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का हिसाब मिला है.
इस गिरोह का जाल भारत के कई राज्यों से लेकर दुबई और चीन तक फैला हुआ था, जहां भारतीय रुपये को यूएई दिरहम और क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर चीनी वेंडरों और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म्स को भेजा जाता था.
मामले में अब तक आठ राज्यों से 23 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि हरियाणा के अंशुल गिनोत्रा और दिल्ली के गर्वित जैन को मुख्य संदिग्ध मानकर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए हैं. पुलिस का अनुमान है कि यह सिंडिकेट साल 2022 से सक्रिय था और इसका वास्तविक पैमाना आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक बड़ा हो सकता है.