रूस-यूक्रेन युद्ध में मृत मंदीप का शव एक साल बाद पहुंचा घर
जालंधर । डेस्क: रूस-यूक्रेन युद्ध की विभीषिका का शिकार हुए पंजाब के 28 वर्षीय मंदीप कुमार का पार्थिव शरीर करीब एक साल के लंबे इंतजार के बाद उनके पैतृक कस्बे गोराया पहुंच गया है. मंदीप के बड़े भाई जगदीप कुमार ने बताया कि शनिवार को दिल्ली हवाई अड्डे पर उनके भाई के अवशेष प्राप्त हुए.
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मंदीप को कथित तौर पर "ट्रैवल एजेंटों" ने इटली भेजने के नाम पर ठगा और जबरन रूसी सेना में भर्ती करा दिया था.
जगदीप कुमार ने अपने भाई की तलाश में दो बार रूस की यात्रा की और अंततः दो महीने पहले डीएनए मिलान के जरिए मंदीप की मृत्यु की पुष्टि हुई.
मंदीप की मौत एक ड्रोन हमले में हुई थी. परिजनों का दावा है कि मंदीप के पैर में जन्मजात दोष था, इसके बावजूद उसे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया.
आखिरी बार 3 मार्च 2024 को हुई 20 सेकंड की बातचीत में मंदीप ने खुद को वहां से बचाने की गुहार लगाई थी.
इस घटना ने एक बार फिर उन एजेंटों के काले कारोबार को उजागर किया है जो भारतीय युवाओं को धोखे से युद्ध के मैदान में धकेल रहे हैं.
जगदीप कुमार के अनुसार, कम से कम 10 अन्य भारतीय भी इस युद्ध में जान गंवा चुके हैं.
भारत सरकार ने इस मुद्दे पर रूस के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए सभी भारतीयों की तत्काल रिहाई की मांग की है और नागरिकों को ऐसी संदिग्ध सैन्य भर्तियों से बचने की चेतावनी दी है.