देश में सरकारी स्कूलों की संख्या घटी
नई दिल्ली । डेस्क: देशभर में सरकारी स्कूलों की संख्या पिछले छह वर्षों में घटी है, लेकिन 10 से कम या शून्य छात्रों वाले स्कूलों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा सोमवार 1 दिसंबर 2025 को लोकसभा में पेश यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के आंकड़ों से यह खुलासा हुआ है.
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम और अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के प्रश्न के जवाब में पेश इस डेटा के अनुसार, 2022-23 में 52,300 सरकारी स्कूल ऐसे थे जिनमें 10 से कम या शून्य छात्र नामांकित थे. यह संख्या 2024-25 में बढ़कर 65,000 से अधिक हो गई. पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्य इन स्कूलों की सबसे अधिक संख्या वाले हैं.
बात यह है कि इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी है. 2022-23 में 1.26 लाख शिक्षक तैनात थे, जो 2024-25 में 1.44 लाख हो गए.
मंत्री प्रधान ने जवाब में कहा कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में है, लेकिन "शिक्षकों की भर्ती, पारिश्रमिक और तर्कसंगत तैनाती संबंधी मामला संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के दायरे में आता है."
नामांकन कम या शून्य होने के कारण बंद, विलय या पुनःउद्देश्य वाले सरकारी स्कूलों के बारे में पूछे गए सवाल पर सरकार ने UDISE+ डेटा पेश किया, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूलों की कुल संख्या में कमी दिखाई गई.
2019-20 में 10.32 लाख सरकारी स्कूल थे, जो 2024-25 में घटकर 10.13 लाख रह गए. इसमें से कितनी कमी बंदी, विलय या पुनःउद्देश्य से हुई, इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया.
सरकारी स्कूलों की स्थिति और वार्षिक रिपोर्टों के बारे में पूछे गए सवाल पर प्रधान ने कहा कि व्यय विभाग के 2016 के विनियमों के तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारें अपनी विधानसभाओं में वार्षिक और ऑडिट रिपोर्टें पहले पेश करती हैं, उसके बाद केंद्र को भेजती हैं. विधानसभा न होने वाले केंद्र शासित प्रदेश सीधे केंद्र को रिपोर्ट भेजते हैं. सरकार ने आखिरी ऐसी रिपोर्ट कब भेजी गई, इसका स्पष्टीकरण नहीं दिया.
यह डेटा शिक्षा क्षेत्र में चुनौतियों को उजागर करता है, जहां ग्रामीण इलाकों में नामांकन की कमी के बावजूद संसाधनों का वितरण एक मुद्दा बना हुआ है.