लेबर कोड को लेकर कोल इंडिया प्रबंधन की जल्दबाजी क्यों- सीटू
कोरबा । संवाददाता: कोल इंडिया प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच नए लेबर कोड को लेकर टकराव की स्थिति बनती नजर आ रही है. हाल ही में कंपनी मुख्यालय में आयोजित एपेक्स जेसीसी कमेटी की बैठक में यूनियनों ने प्रबंधन द्वारा नई श्रम संहिताओं को लागू करने में दिखाई जा रही जल्दबाजी का पुरजोर विरोध किया.
श्रमिक नेताओं का कहना है कि देश का कोई भी दूसरा सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू) इन नियमों को इतनी तेजी से लागू करने की कोशिश नहीं कर रहा है, तो फिर कोल इंडिया प्रबंधन इसमें इतनी उत्सुकता क्यों दिखा रहा है.
इस महत्वपूर्ण बैठक में यूनियनों ने एसईसीएल समेत सभी अनुषंगी कंपनियों के कर्मचारियों के लिए 12वें जेबीसीसीआई (जॉइंट बाइपार्टाइट कमेटी फॉर द कोल इंडस्ट्री) के गठन की मांग भी प्रमुखता से उठाई.
हालांकि, प्रबंधन ने कोयला कर्मियों से जुड़े इस बेहद संवेदनशील और जरूरी विषय पर कोई ठोस फैसला लेने के बजाय इसे अगली बैठक तक के लिए टाल दिया. प्रबंधन के इस टालमटोल वाले रवैये से कर्मचारी प्रतिनिधियों में खासा असंतोष है.
गौरतलब है कि कोयला क्षेत्र के कर्मचारियों का मौजूदा 11वां वेतन समझौता आगामी 30 जून को समाप्त होने जा रहा है. नियमानुसार हर पांच साल में कोयला कर्मियों के वेतन निर्धारण के लिए जेबीसीसीआई कमेटी का गठन किया जाता है, जो नए वेतनमान पर मुहर लगाती है.
सीटू के वरिष्ठ नेता वीएम मनोहर और एटक के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दीपेश मिश्रा ने इस मामले में प्रबंधन के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि बैठक से उन्हें किसी स्पष्ट जवाब की उम्मीद थी, लेकिन प्रबंधन की तरफ से केवल आश्वासन देकर मामले को आगे बढ़ा दिया गया.
यूनियनों ने चेतावनी दी है कि बिना उचित विचार-विमर्श के नए लेबर कोड को थोपने और वेतन समझौते में देरी करने का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा.