सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेता को लगाई फटकार-मजिस्ट्रेट के पास जाएं
नई दिल्ली । डेस्क: सर्वोच्च न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के व्यवसायी और कांग्रेस नेता हेमंत चंद्राकर की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर धन शोधन मामले की पूछताछ के दौरान हिरासत में कथित तौर पर यातना देने का आरोप लगाया था.
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने याचिका को यह सवाल करते हुए खारिज कर दिया कि चंद्राकर ने अधिकार क्षेत्र वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के समक्ष शिकायत दर्ज कराने के बजाय सीधे उच्च न्यायालय का दरवाजा क्यों खटखटाया.
न्यायमूर्ति कांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाएँ. ... समस्या बस यह है कि ये लोग अपनी हैसियत के प्रतीक (स्टेटस सिंबल) के प्रति आसक्त हैं. आपको लगता है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट उनके लिए बहुत छोटा है. यही हो रहा है, कानून की महिमा को पहचानने के बजाय."
चंद्राकर, जो मेसर्स सृष्टि ऑर्गेनिक्स (उर्वरक और कीटनाशक निर्माता) के मालिक हैं, ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि 3 सितंबर, 2025 को उनके आवास पर छापे और बाद की पूछताछ के दौरान ED अधिकारियों ने उन्हें और उनके परिवार को धमकाया और दुर्व्यवहार किया.
उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने उन्हें यह कबूल करने के लिए मजबूर किया कि उनकी फर्म ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके सहयोगियों को कमीशन देकर सरकारी आपूर्ति ठेके हासिल किए.
याचिकाकर्ता ने पहले छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कथित यातना की न्यायिक जाँच, ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और CCTV निगरानी व वकील की उपस्थिति में बयान दर्ज करने की अनुमति मांगी थी.
उच्च न्यायालय ने ED के इस आश्वासन पर याचिका खारिज कर दी थी कि सभी पूछताछ कानूनी तौर पर और बिना किसी जबरदस्ती के की जाएगी. इसी फैसले को चुनौती देते हुए चंद्राकर सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे.
वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बसंत ने चंद्राकर की ओर से दलील दी कि ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय खुद को "असहाय नहीं मान सकता."
हालांकि, न्यायमूर्ति कांत ने इस बात पर जोर दिया कि देश में अमीरों और गरीबों के लिए "दो अलग-अलग प्रकार की कानूनी प्रणालियाँ" विकसित हो रही हैं, जो चिंता का विषय है. उन्होंने याचिकाकर्ता को मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने उपाय तलाशने की सलाह दी.
बसंत ने CCTV फुटेज का हवाला देते हुए यह भी आरोप लगाया कि चंद्राकर को कैमरे की निगरानी वाले कमरे से बाहर ले जाकर यातना दी गई, जिसे ED अधिकारियों द्वारा सत्यापित किया जा सकता है.
कोर्ट ने चंद्राकर को मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज करने की सलाह को दोहराया और अंततः याचिका को खारिज कर दिया.