नोबेल शांति पुरस्कार: मारिया कोरिना मचाडो को सम्मान का विरोध
नई दिल्ली । डेस्क: वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की घोषणा ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है. नॉर्वे की नोबेल समिति ने उन्हें वेनेजुएला में तानाशाही के खिलाफ अहिंसक संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए यह सम्मान देने का फैसला किया.
समिति के मुताबिक, मचाडो ने कठिन परिस्थितियों में भी देश नहीं छोड़ा और लाखों लोगों को प्रेरित किया, जो स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रतीक बन गया. लेकिन यह खुशी का पल जल्द ही आलोचनाओं की भारी बौछार में बदल गया.
विपक्षी आंदोलन की इस चेहरा रहीं मचाडो पर अब सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा है. आलोचकों का मानना है कि उनका पुरस्कार न केवल अनुचित है, बल्कि इसे वापस ले लिया जाना चाहिए. वेनेजुएला की सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों ने इसे 'शर्मनाक' करार देते हुए कहा कि मचाडो ने विदेशी ताकतों की साजिश रचकर देश में अस्थिरता फैलाई.
पूर्व उपराष्ट्रपति पाब्लो इग्लेसियास ने तो उन्हें हिटलर की विचारधारा का समर्थक तक बता डाला, जो तख्तापलट की साजिशों से जुड़ी हुई हैं.
दुनिया भर में कई वामपंथी विचारक और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी इस फैसले के खिलाफ उतर आए हैं. अमेरिका स्थित मुस्लिम सिविल राइट्स संगठन काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (CAIR) ने नोबेल समिति से पुरस्कार रद्द करने की मांग की है. CAIR के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि मचाडो का चयन नोबेल की साख को धक्का पहुंचा सकता है. उनका आरोप है कि मचाडो इजरायल के कथित मुस्लिम-विरोधी एजेंडे का खुला समर्थन करती रही हैं.
खासकर गाजा में इजरायली हमलों को वे जायज ठहराती हैं, जो उनकी पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट्स से साफ झलकता है. दो साल पहले एक पोस्ट में उन्होंने वेनेजुएला के संघर्ष को इजरायल की 'आजादी' से जोड़ दिया था और सत्ता में आने पर इजरायल की मदद का वादा किया था.
मचाडो पर विदेशी हस्तक्षेप के आरोप भी गंभीर हैं. 2018 में उन्होंने इजरायल और अर्जेंटीना जैसे देशों को पत्र लिखकर राष्ट्रपति निकोलास मादुरो को हटाने की अपील की थी.
आलोचकों का कहना है कि दक्षिणपंथी अमेरिकी ताकतों से उनकी नजदीकी पुरानी है, जो वेनेजुएला पर आर्थिक प्रतिबंधों का समर्थन करती हैं.
व्हाइट हाउस ने भी इस पुरस्कार पर सवाल उठाते हुए कहा कि समिति ने राजनीति को शांति के ऊपर तरजीह दे दी. वेनेजुएला के आम लोग इसे अमेरिका में उनके निर्वासन के खतरे को कम करने वाला मानकर खुश हैं, लेकिन कई का मानना है कि ऐसे विवादास्पद चेहरे को शांति का पुरस्कार देना अनुचित है.
मचाडो ने पुरस्कार की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को समर्पित कर दिया. उन्होंने कहा कि यह जीत लोकतंत्र की वैश्विक लड़ाई का प्रतीक है.
नोबेल समिति ने विवादों पर टिप्पणी करते हुए दोहराया कि उनका चयन वेनेजुएला में शांतिपूर्ण परिवर्तन के प्रयासों पर आधारित है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह पुरस्कार शांति को मजबूत करेगा या और बंटवारे का कारण बनेगा? आने वाले दिनों में बहस और तेज होने के आसार हैं.