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केरल में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' से महिला की मौत

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20 मई 2026, 07:52 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

Brain eating amoeba
Brain eating amoeba

तिरुवनंतपुरम । डेस्क: केरल में एक महिला की 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' से मृत्यु हो गई है. केरल के एर्नकुलम जिले के कोठामंगलम में प्राइमरी अमीबिक मेनिन्गोएन्सेफलाइटिस (PAM), जिसे आम भाषा में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' (दिमाग खाने वाला अमीबा) कहा जाता है, के कारण एक 73 वर्षीय बुजुर्ग महिला की मौत का बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. 


स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि की है कि यह जानलेवा और दुर्लभ संक्रमण मीठे पानी, झीलों और नदियों में पाए जाने वाले 'नेगलेरिया फाउलरी' नाम के मुक्त-जीवित अमीबा के कारण होता है.

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोठामंगलम के नेल्लीकुझी की रहने वाली यह महिला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की कार्यकर्ता थी. आशंका जताई जा रही है कि एक नहर से जुटाए गए असुरक्षित पानी से चेहरा धोने के कारण वह इस खतरनाक संक्रमण की चपेट में आ गई. महिला को 6 मई को बुखार और सिरदर्द जैसे लक्षण शुरू हुए थे, जिसके बाद 8 मई को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. 


स्थिति बिगड़ने पर उन्हें दूसरे अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन गंभीर हालत के चलते आखिरकार 15 मई को उन्होंने दम तोड़ दिया.


इस दुखद घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है. एर्नकुलम के जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर शाहिरशाह के नेतृत्व में नेल्लीकुझी पंचायत के स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रभावित क्षेत्र के कुओं और जल स्रोतों का सुपरक्लोरीनीकरण (Superchlorination) कर दिया है. 


इसके साथ ही मृतका के साथ काम करने वाले करीब 20 अन्य लोगों के स्वास्थ्य की भी सघन जांच की गई है, जिनमें फिलहाल संक्रमण का कोई लक्षण नहीं मिला है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने आम जनता को चेतावनी जारी करते हुए विशेष रूप से ठहरे हुए और असुरक्षित जल निकायों में नहाने या तैरने से बचने की सख्त सलाह दी है.


गौरतलब है कि ब्रेन-ईटिंग अमीबा (दिमाग खाने वाला अमीबा) का वैज्ञानिक नाम 'नेगलेरिया फाउलरी' (Naegleria fowleri) है. यह एक कोशिकीय जीव (अमीबा) है जो मुख्य रूप से गर्म और मीठे पानी के स्रोतों जैसे झीलों, नदियों, गर्म झरनों और कभी-कभी ठीक से रखरखाव न किए गए स्विमिंग पूल या ठहरे हुए पानी में पाया जाता है. 


यह अमीबा सामान्यतः पानी पीने से इंसानों को संक्रमित नहीं करता है, बल्कि जब कोई व्यक्ति ऐसे दूषित पानी में नहाता है, तैरता है या उससे चेहरा धोता है, तो पानी के साथ यह अमीबा नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश कर जाता है. नाक के जरिए यह सीधे दिमाग तक पहुँच जाता है और वहां मौजूद तंत्रिकाओं व ऊतकों को नष्ट करना शुरू कर देता है.


दिमाग में पहुँचकर यह अमीबा 'प्राइमरी अमीबिक मेनिन्गोएन्सेफलाइटिस' (PAM) नाम का एक बेहद दुर्लभ लेकिन अत्यंत घातक और जानलेवा संक्रमण पैदा करता है. 


शरीर में प्रवेश करने के लगभग 1 से 12 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जिनमें तेज बुखार, असहनीय सिरदर्द, उल्टी, गर्दन में अकड़न, मानसिक भ्रम और दौरे पड़ना शामिल हैं. 


यह संक्रमण इतनी तेजी से फैलता है कि लक्षण दिखने के कुछ ही दिनों के भीतर मरीज की स्थिति बेहद गंभीर हो जाती है और इसमें मृत्यु दर 97 प्रतिशत से भी अधिक होती है. इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि असुरक्षित, ठहरे हुए या गंदे पानी के स्रोतों में नहाने और तैरने से पूरी तरह बचा जाए और चेहरे को साफ पानी से ही धोया जाए.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP