नन गिरफ्तारी पर राजनीति गरम, सरकार पर भड़के भूपेश बघेल
नन गिरफ्तारी को हमने संसद में उठाया है- भूपेश बघेल
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन पर दो केरल की कैथोलिक ननों की मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोप में हुई गिरफ्तारी ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है. कांग्रेस नेताओं ने सत्तारूढ़ भाजपा पर ईसाई अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और उनके वैध अधिकारों को दबाने का आरोप लगाया है.
दुर्ग में पत्रकारों से बात करते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने कहा, "हमने इस मुद्दे को लोकसभा में उठाया और मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा. केरल के सांसदों और विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल ननों से मिलने आया था, लेकिन उन्हें बताया गया कि बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल रायपुर में है, इसलिए उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई. मैंने डीजी को कहा कि उन्हें मिलने की अनुमति दी जये, वरना हम यहां धरना देंगे. अब उनकी मुलाकात हो चुकी है."
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मामले में संदेह जताते हुये कहा कि घटना में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है. उन्होंने कहा, "कांग्रेस सांसदों ने केरल और दिल्ली में प्रदर्शन किया है. यहाँ तक कि केरल के बीजेपी महासचिव ने भी इस मुद्दे पर गृह मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात की है. इससे साफ है कि कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ है."
सीपीआई नेता एनी राजा, जिन्होंने ननों से मिलने की कोशिश की, ने जेल प्रशासन पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "हमने उचित आवेदन दिया था. आवेदन देते समय अधिकारियों ने कहा था कि वे सभी व्यवस्थायें करेंगे. लेकिन अब वे कह रहे हैं कि हमने जेल के नियम तोड़े. हमसे पहले आये लोगों ने बताया कि उन्होंने दोपहर 3 बजे के बाद ननों से मुलाकात की थी. शायद उन्हें सीएम, आरएसएस या बजरंग दल से आदेश मिले हों कि हमें मिलने न दिया जाये."
वहीं, राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हये इसे "राजनीतिक नाटक" करार दिया. उन्होंने कहा, "सांसदों को जेल में ननों से मिलने से नहीं रोका गया. मुलाकात का समय दोपहर 1:30 बजे निर्धारित था, लेकिन वे समय पर नहीं आये. इसके बावजूद, मैंने जेल प्रशासन से बात कर मुलाकात की व्यवस्था की. कानून किसी को मिलने से नहीं रोकता, लेकिन कानून अपना काम करेगा."
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया ने 27 जुलाई को इस घटना की कड़ी निंदा की. कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के बयान में कहा गया, "ऐसी घटनाएं न केवल महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि उनके जीवन को भी गंभीर खतरे में डालती हैं. इस तरह की बार-बार होने वाली अनुचित कार्रवाइयां संविधान का गंभीर उल्लंघन हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जा सकता."
संगठन ने दावा किया कि गिरफ्तार महिलाओं के पास उनके माता-पिता की लिखित सहमति थी, फिर भी उन्हें गिरफ्तारी के बाद शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया.
दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के. सुरेश ने इस घटना के लिए दक्षिणपंथी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने कहा, "छत्तीसगढ़ में भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ईसाई अल्पसंख्यकों पर बजरंग दल द्वारा बीजेपी सरकार के समर्थन से हर दिन हमले हो रहे हैं. दो दिन पहले, दो लड़कियां अपनी मर्जी से ननों के साथ काम करने के लये आई थीं. लेकिन बजरंग दल ने तय कर लिया कि ये नन दो लड़कियों को हिंदू से ईसाई धर्म में परिवर्तन के लिये ले जा रही थीं. इसके बाद उन्होंने ननों पर हमला किया और छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की. अब दो निर्दोष नन और वे लड़कियां जेल में हैं."
यह घटना 25 जुलाई को हुई, जब स्थानीय शिकायत के आधार पर पुलिस ने दुर्ग रेलवे स्टेशन पर ननों को गिरफ्तार किया था.