इजरायली नाकेबंदी ने छीना गाजा के लोगों से हज का सपना
गाजा सिटी । डेस्क: वर्षों से पवित्र मक्का की यात्रा और हज करने का सपना संजोए गाजा पट्टी के हजारों फिलिस्तीनियों की उम्मीदें इस साल भी टूट गई हैं. इजरायल की लगातार जारी सैन्य घेराबंदी और राफा बॉर्डर बंद होने के कारण लगातार तीसरे वर्ष भी गाजा का कोई भी नागरिक हज यात्रा पर नहीं जा सका है.
गाजा के 'अवकफ और धार्मिक मामलों के मंत्रालय' के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 10,000 से अधिक नागरिकों को हज करने से रोका गया है. वहीं, आधिकारिक ड्रॉ में चुने गए कम से कम 71 तीर्थयात्रियों की हज पर जाने से पहले ही इजरायली हमलों में मौत हो चुकी है.
उत्तरी गाजा में अपने ढहे हुए घर के मलबे पर बने एक अस्थायी तंबू में रहने वाली 65 वर्षीय हनान अल-हम्स ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्होंने इस युद्ध में अपना बेटा और घर खो दिया, और अब वह उस पवित्र यात्रा से भी वंचित रह गईं जिसका उन्होंने दशकों तक इंतजार किया था.
गाजा में 2025 में हुए संघर्षविराम के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, क्योंकि इजरायल ने युद्ध समाप्त होने के बावजूद गाजा के 60 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र पर अपना सैन्य कब्जा बनाए रखा है.
इस मानवीय त्रासदी का असर गाजा की अर्थव्यवस्था पर भी बेहद गहरा पड़ा है. फिलिस्तीनी सेंटर फॉर पॉलिटिकल स्टडीज (PCPS) द्वारा मई 2026 में प्रकाशित एक शोध रिपोर्ट में इजरायल के इस कदम को हज और उमराह क्षेत्र के खिलाफ एक "संरचनात्मक आर्थिक नरसंहार" बताया गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में सक्रिय सभी 78 लाइसेंस प्राप्त ट्रैवल कंपनियां पूरी तरह से बंद या नष्ट हो चुकी हैं. इससे उद्योग को 40 लाख डॉलर से अधिक का सीधा नुकसान हुआ है, जबकि सऊदी अरब और मिस्र के होटलों व एयरलाइंस में लगभग 20 से 30 लाख डॉलर की रकम फ्रीज हो चुकी है.
युद्ध से पहले यह सेक्टर गाजा की स्थानीय अर्थव्यवस्था में सालाना 1.2 करोड़ डॉलर का योगदान देता था, जिससे 1,500 से अधिक परिवारों की आजीविका चलती थी.
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक पर्यटन क्षेत्र और नागरिक संपत्तियों को जानबूझकर निशाना बनाना चौथे जिनेवा कन्वेंशन के अनुच्छेद 33 के तहत "सामूहिक सजा" की श्रेणी में आता है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सख्त प्रतिबंधित है.
वर्तमान में गाजा के कोटे की 3,000 सीटों को मिस्र या अन्य देशों में रह रहे फिलिस्तीनियों और वेस्ट बैंक के नागरिकों से भरा जा रहा है. गाजा के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय, सऊदी अरब और मिस्र से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि धार्मिक यात्राओं को राजनीतिक एजेंडे से अलग रखा जा सके.