इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़कर हुआ ₹25,000, बाकी मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टरों का प्रदर्शन जारी
रायपुर । संवाददाता: जूनियर डॉक्टरों के लगातार जारी आंदोलन के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस (MBBS) इंटर्न्स का मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹25,000 करने का फैसला किया है. चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह नई दर 1 अक्टूबर से लागू होगी.
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के प्रस्ताव और वित्त विभाग की सहमति के बाद यह संशोधन किया गया है, जिससे प्रदेशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न्स को सीधा लाभ मिलेगा.
हालाँकि, छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है. जेडीए के अध्यक्ष डॉ. पीयूष श्रीवास्तव का कहना है कि सरकार का यह आदेश केवल इंटर्न्स के स्टाइपेंड से जुड़ा है, जबकि उनकी मुख्य मांगों में सभी वर्ग के डॉक्टरों (रेसिडेंट और बॉन्डेड डॉक्टर) के मानदेय में संशोधन, बॉन्ड व्यवस्था में बदलाव और सुपर-स्पेशलिटी कैडर का गठन शामिल है.
डॉक्टरों ने मांग पूरी होने तक लिखित आदेश जारी होने तक प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है.
रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर और जगदलपुर के मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों के इस विरोध प्रदर्शन के तहत गुरुवार को ओपीडी (OPD) सेवाओं का बहिष्कार किया गया और धरना स्थल पर ही समानांतर ओपीडी चलाकर मरीजों का इलाज किया गया.
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि 28 सितंबर तक उनकी अन्य मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आपातकालीन सेवाओं को भी ठप कर आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
छत्तीसगढ़ में आंदोलन कर रहे जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
1) सुपर-स्पेशलिटी कैडर का गठन: प्रदेश में ही लिवर/किडनी ट्रांसप्लांट और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के आधुनिक इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अलग से 'सुपर-स्पेशलिटी कैडर' बनाया जाए, ताकि मरीजों को राज्य से बाहर न जाना पड़े.
2) बॉन्ड व्यवस्था में व्यावहारिक सुधार: एमबीबीएस और पीजी डॉक्टरों पर लागू वर्तमान सर्विस बॉन्ड नीति की समीक्षा की जाए. (एसोसिएशन के अनुसार, अभी एक एमबीबीएस डॉक्टर पर करीब 4 साल की सेवा का बॉन्ड और ₹75 लाख तक का वित्तीय बोझ होता है; इसे घटाकर अधिक व्यावहारिक बनाया जाए.)
3) मानदेय में वृद्धि: अन्य राज्यों की तुलना में कम स्टाइपेंड/वेतन का हवाला देते हुए 24 घंटे आपातकालीन सेवाओं, आईसीयू (ICU), ओटी (OT), वार्डों और ओपीडी में काम करने वाले सभी वर्गों के डॉक्टरों-जैसे इंटर्न्स, पीजी रेसिडेंट्स, पोस्ट-पीजी डॉक्टर्स, पीजी-बॉन्डेड और एमबीबीएस-बॉन्डेड डॉक्टरों के मानदेय में बढ़ोतरी की जाए.
4) सेवा शर्तों और कार्य-स्थितियों में सुधार: डॉक्टरों की काम करने की परिस्थितियों को बेहतर बनाया जाए, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के भविष्य और डॉक्टरों के हितों की रक्षा हो सके.