भारत में जन्मा पहला चीता वयस्क होने को तैयार
भोपाल । डेस्क: भारत में चीता पुनर्वास परियोजना को एक बड़ी सफलता मिली है. 29 सितंबर, 2025 को कुणो नेशनल पार्क (केएनपी) में भारत में जन्मा पहला चीता, मादा शावक 'मुखी', वयस्कता की उम्र में पहुंच जाएगा. प्रोजेक्ट चीता के निदेशक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि 29 मार्च, 2023 को नामीबियाई चीता 'ज्वाला' से जन्मी मुखी अब 915 दिन यानी 30 महीने की हो जाएगी और भारत में चीता आबादी बढ़ाने में योगदान देने के लिए तैयार है.
शर्मा ने कहा, "ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया था, लेकिन अत्यधिक गर्मी के कारण तीन की मृत्यु हो गई. मुखी जीवित रही और स्वस्थ रूप से विकसित हुई है. आज हमारी मेहनत रंग लाई है."
गौरतलब है कि 17 सितंबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कुणो में एक विशेष बाड़े में छोड़ा था. यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े जंगली मांसाहारी प्रजाति का स्थानांतरण था. इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को भारत लाया गया.
वर्तमान में भारत में 27 चीते हैं, जिनमें 16 भारत में जन्मे हैं. इनमें से 24 कुणो नेशनल पार्क में और तीन गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं. शर्मा ने बताया कि परियोजना शुरू होने के बाद से 19 चीते (नौ आयातित वयस्क और 10 भारत में जन्मे शावक) विभिन्न कारणों से मरे, जबकि कुणो में अब तक कुल 26 शावक जन्मे हैं.
तीन साल की इस परियोजना में भारत ने अफ्रीका से 20 चीतों को आयात किया, और अब शुरुआती संख्या की तुलना में सात चीतों की वृद्धि हुई है.
प्रोजेक्ट चीता से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना "बड़ी सफलता" है, और दुनिया के पहले अंतरमहाद्वीपीय बड़े मांसाहारी स्थानांतरण की शुरुआती चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया है.
सूत्रों के अनुसार, चीतों ने भारतीय परिस्थितियों में अच्छा अनुकूलन दिखाया है, क्योंकि उन्होंने यहां कई बार प्रजनन किया है. कुणो में शावकों की जीवित रहने की दर 61% से अधिक है, जो वैश्विक औसत 40% से काफी बेहतर है.
भारत कुछ अफ्रीकी देशों के साथ नई चीता खेप लाने के लिए बातचीत कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, इस दिसंबर तक बोत्सवाना से 8-10 चीतों का एक समूह भारत आ सकता है. इसके अलावा, नामीबिया, जिसने पहले भी चीते उपलब्ध कराए हैं, सहित अन्य देशों से भी चीतों को लाने की संभावना तलाशी जा रही है. (फोटो- प्रतीकात्मक)