DMF घोटाला मामले में 9 ठिकानों पर ED की छापेमारी
रायपुर । संवाददाता: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹575 करोड़ के कथित जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) घोटाला मामले में प्रदेश के 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह तलाशी अभियान रायपुर जोनल ऑफिस के नेतृत्व में चलाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आवंटित सरकारी धन में हुई हेराफेरी की कड़ियों को जोड़ना है.
एजेंसी के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई मामले के मुख्य आरोपियों में से एक श्रीकांत दुबे और अन्य से जुड़े ठिकानों पर की गई है. आरोप है कि 'छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम' के जरिए दिए गए ठेकों में भारी वित्तीय अनियमितता और गबन किया गया.
छापेमारी के दौरान ईडी की टीमों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं, जो आगे की जांच में बेहद अहम कड़ी साबित हो सकते हैं.
इससे पहले भी ईडी ने पिछले साल 3 सितंबर 2025 को इस घोटाले को लेकर एक बड़ा देशव्यापी क्रैकडाउन किया था, जिसके तहत 18 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए थे. जांच के दायरे में कई बड़े सरकारी अधिकारी, बिचौलिए, ठेकेदार और टेंडर जारी करने वाली अथॉरिटी शामिल हैं. ईडी इस बात की बारीकी से जांच कर रही है कि किस तरह बिजनेसमैन विनय गर्ग और अन्य बिचौलियों ने बीज निगम के जरिए फर्जी लेनदेन कर विकास कार्यों के पैसों को डायवर्ट किया.
इस पूरे मामले की शुरुआती जांच छत्तीसगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने की थी, जिसने स्थानीय अदालत में करीब 6,000 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है.
इसी चार्जशीट के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर अपनी जांच तेज की. जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए डीएमएफ के खर्च से जुड़े नियमों और श्रेणियों में जानबूझकर बदलाव किए गए थे. बुनियादी विकास कार्यों को दरकिनार कर सामग्री आपूर्ति, ट्रेनिंग प्रोग्राम और कृषि उपकरण जैसी नई कैटेगरीज जोड़ी गईं ताकि मोटी कमीशनखोरी की जा सके.
जांच में सामने आया है कि इस टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों को कथित तौर पर 42 प्रतिशत तक का भारी-भरकम कमीशन दिया जाता था. इस मामले में जेल में बंद कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी और उसकी एनजीओ 'उद्गम सेवा समिति' की भूमिका भी मुख्य रूप से सामने आई है.
आरोप है कि द्विवेदी ने साल 2021-22 और 2022-23 के दौरान निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और अन्य अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर करोड़ों रुपये के डीएमएफ कॉन्ट्रैक्ट हासिल किए और ऊंचे पदों पर बैठे लोगों तक कमीशन पहुंचाया.
केंद्रीय एजेंसी ने साफ किया है कि जब्त दस्तावेजों की स्क्रूटनी के बाद आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और छापेमारी हो सकती है.