नेपाल में श्रृंगार और टूथपेस्ट में मिला जानलेवा लेड
काठमांडू । डेस्क: नेपाल में महिलाओं और बच्चों द्वारा रोजाना इस्तेमाल किए जाने वाले सौंदर्य प्रसाधनों और टूथपेस्ट में भारी मात्रा में 'लेड' (सीसा) जैसा जहरीला तत्व पाया गया है. जो कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है. सेंटर फॉर पब्लिक हेल्थ एंड एनवायर्नमेंटल डेवलपमेंट (CEPHED) द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि सिंदूर, काजल और टूथपेस्ट जैसे उत्पादों के लगभग एक-तिहाई नमूनों में लेड की उच्च सांद्रता मौजूद है.
यह अध्ययन अमेरिका के लीड पॉइजनिंग एलिमिनेशन प्रोजेक्ट (LEEP) के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है, जिसमें पाया गया कि 31 प्रतिशत नमूनों में लेड की मौजूदगी है, जबकि 24 प्रतिशत नमूने अमेरिका और कनाडा द्वारा निर्धारित 1 पीपीएम (ppm) की सुरक्षित सीमा को पार कर चुके हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि कुछ नमूनों ने नेपाल के अपने 10 पीपीएम के ढीले मानदंडों का भी उल्लंघन किया है.
अध्ययन के अनुसार, सिंदूर सबसे अधिक दूषित पाया गया है, जिसके 40 प्रतिशत नमूनों में लेड मिला है. काठमांडू घाटी में तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जहाँ कुछ ब्रांड्स में लेड की मात्रा 124.73 पीपीएम तक दर्ज की गई.
टूथपेस्ट की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ लगभग 45 प्रतिशत नमूनों में लेड पाया गया है. रिपोर्ट में कोलगेट, पेप्सोडेंट, डाबर रेड और दंत कांति जैसे प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ-साथ हिमालय किड्स ऑरेंज टूथपेस्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें लेड का स्तर अनुशंसित सीमा से अधिक है.
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बच्चे वयस्कों की तुलना में लेड को 4-5 गुना तेजी से अवशोषित करते हैं, जिससे उनके मानसिक विकास, आईक्यू (IQ) स्तर और गुर्दे पर बेहद बुरा असर पड़ सकता है.
सेंटर फॉर पब्लिक हेल्थ एंड एनवायर्नमेंटल डेवलपमेंट के कार्यकारी निदेशक राम चरित्र साह ने सरकार से मांग की है कि इन उत्पादों के लिए सख्त नियामक ढांचा तैयार किया जाए और 1 पीपीएम से अधिक लेड वाले उत्पादों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए ताकि भविष्य की पीढ़ी को इस 'खामोश जहर' से बचाया जा सके.