Cong ने Sebi की मंजूरी के बावजूद अडानी समूह की जांच की मांग दोहराई
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को अडानी समूह के लेनदेन की गहन जांच की अपनी पार्टी की मांग को दोहराया है. भले ही भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस समूह को क्लीन चिट दे दी हो. रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी की "हम अडानी के हैं कौन" (एचएएचके) श्रृंखला में उठाए गए सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं.
जयराम रमेश ने कहा, "हमारी "हम अडानी के हैं कौन" 100-सवालों की श्रृंखला में उठाए गए सवालों का जवाब अभी तक नहीं मिला है."
उन्होंने कथित "मोदानी घोटाले" की सभी आयामों में जांच की आवश्यकता पर बल दिया. रमेश ने सेबी की भूमिका पर भी सवाल उठाए, जो अडानी समूह द्वारा प्रतिभूति और अन्य कानूनों के कथित उल्लंघन की जांच कर रही है.
"हम अडानी के हैं कौन" श्रृंखला ने अडानी समूह के लेनदेन में कथित अनियमितताओं और सरकार के साथ इसके संबंधों को उजागर किया.
रमेश ने बताया कि यह मामला कहीं अधिक गहरा है, जिसमें भारतीय विदेश नीति का दुरुपयोग, जांच एजेंसियों का दुरुपयोग, और सेबी जैसे संस्थानों पर कब्जा शामिल है.
अडानी समूह पर रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं, जिसमें अमेरिकी अटॉर्नी कार्यालय ने गौतम अडानी और अन्य पर प्रतिभूति और वायर धोखाधड़ी की साजिश का आरोप लगाया है.
जयराम रमेश ने अडानी समूह के लेनदेन की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग की है, जिसमें बढ़ते एकाधिकार, मुद्रास्फीति और विदेश नीति चुनौतियों का हवाला दिया गया है.
रमेश ने अडानी समूह के लेनदेन के भारत की विदेश नीति पर प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई, जिसमें अमेरिकी रिश्वतखोरी के अभियोग के बाद केन्या में हवाई अड्डे और बिजली संचरण सौदों के रद्द होने का उल्लेख किया. उन्होंने कहा, "हमारे राष्ट्र की विदेश नीति को केवल एक व्यापारिक समूह के हितों के अधीन नहीं किया जा सकता."