ग्लोबल वॉर्मिंग की बड़ी चेतावनी: CO2 ने तोड़ा 67 साल का रिकॉर्ड
जिनेवा । डेस्क: ब्राजील COP30 शिखर सम्मेलन से ठीक पहले (WMO रिपोर्ट)विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने जिनेवा से जारी एक नई रिपोर्ट में पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी और चिंताजनक चेतावनी जारी की है. इस रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस का स्तर अब तक के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है. यह खतरनाक वृद्धि पृथ्वी के तापमान में लंबे समय तक बढ़ोतरी का आधार तैयार कर रही है.
यह रिपोर्ट, जिसका शीर्षक 'WMO ग्रीनहाउस गैस बुलेटिन' है, ब्राजील के बेलेम में होने वाले वैश्विक COP30 जलवायु शिखर सम्मेलन से ठीक एक महीने पहले आई है. COP30 सम्मेलन में दुनिया भर के नेता जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कदम उठाने पर चर्चा करेंगे.
CO2 में रिकॉर्ड तोड़ उछाल क्यों?
रिपोर्ट ने CO2 के इस भयानक उछाल के लिए तीन मुख्य कारण बताए हैं:
इंसानी गतिविधियाँ: लगातार जारी उत्सर्जन, जैसे जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल, डीज़ल) का जलाया जाना.जंगलों की आग: जंगल की आग (Wildfires) से अचानक कार्बन का भारी मात्रा में वातावरण में मिलना.
कमजोर 'कार्बन सिंक': धरती और महासागरों की कार्बन सोखने की क्षमता में कमी आना.
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 में आए अल नीनो (El Niño) नामक मौसमी घटनाक्रम ने भी CO2 की बढ़ोतरी को बढ़ावा दिया है. अल नीनो के कारण भूमि की कार्बन सोखने की क्षमता कम हो जाती है, क्योंकि कई जगह सूखा पड़ता है और जंगलों में आग लगती है.
WMO के उप-महासचिव को बैरेट ने कहा, "CO2 और अन्य ग्रीनहाउस गैसों द्वारा बढ़ाई गई गर्मी हमारे मौसम को तेज़ी से बदल रही है".
67 सालों में सबसे तेज़ वृद्धि
WMO के आँकड़ों के मुताबिक, CO2 के स्तर में यह वृद्धि चौंकाने वाली है. 1957 में आधुनिक माप शुरू होने के बाद से 2024 में 3.5ppm (पार्ट्स प्रति मिलियन) की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है. 2004 में CO2 का औसत स्तर 377.1 ppm था. 2024 में यह 423.9 ppm पर पहुँच गया है, जो बीस साल में 12% से ज़्यादा की बढ़ोतरी है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी अन्य ग्रीनहाउस गैसों का स्तर भी रिकॉर्ड ऊँचाई पर है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग को और बढ़ा रहा है.
WMO ने इस वैज्ञानिक जानकारी को नवंबर में होने वाले COP30 सम्मेलन के लिए जारी किया है, ताकि विकसित देशों सहित पूरी दुनिया में जलवायु कार्रवाई को तेज़ करने पर ज़ोर दिया जा सके.