जलवायु परिवर्तन: अब गर्म पानी में पनप रहा है 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा'
नई दिल्ली । डेस्क: जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल बढ़ते तापमान या चक्रवातों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह इंसानी सेहत के लिए एक अदृश्य और घातक खतरा भी बन गया है. हालिया वैज्ञानिक शोधों में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दुनिया भर में बढ़ती गर्मी के कारण जलाशयों में खतरनाक अमीबा तेजी से फैल रहे हैं. इनमें सबसे घातक 'नेग्लरिया फाउलेरी' है, जिसे आम भाषा में 'ब्रेन-ईटिंग अमीबा' कहा जाता है.
यह सूक्ष्मजीव आमतौर पर झीलों, नदियों, गर्म झरनों और ठीक से रखरखाव न किए गए स्विमिंग पूल जैसे गर्म पानी के स्रोतों में पाया जाता है. खतरा तब बढ़ जाता है जब तैराकी के दौरान यह पानी नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है.
यहाँ से यह सीधे मस्तिष्क तक पहुँचकर 'प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस' (PAM) नामक संक्रमण पैदा करता है. हालांकि यह संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन इसकी गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें मृत्यु दर 97 प्रतिशत से भी अधिक है.
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण जैसे-जैसे जल निकायों का तापमान बढ़ रहा है, इन अमीबाओं के पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो रहा है. पहले जो अमीबा केवल उष्णकटिबंधीय यानी गर्म क्षेत्रों तक सीमित थे, वे अब यूरोप, उत्तरी अमेरिका और एशिया के ठंडे इलाकों में भी पाए जा रहे हैं.
इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने 'अकांथामीबा' और 'बालामूथिया मैंड्रिलारिस' जैसे अन्य अमीबाओं के प्रति भी आगाह किया है, जो आंखों, त्वचा और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं.
इस बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है. गर्म पानी में तैराकी करते समय नोज-क्लिप का उपयोग करना या नाक बंद रखना बेहद जरूरी है, विशेषकर बच्चों के मामले में.
इसके अलावा, नाक साफ करने के लिए हमेशा उबले हुए या शुद्ध पानी का ही उपयोग करना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जलवायु परिवर्तन और जल प्रदूषण पर लगाम नहीं लगाई गई, तो भविष्य में बीमारियों का यह बदलता नक्शा और भी भयावह रूप ले सकता है.