शराब घोटाला: ED ने चैतन्य के खिलाफ दायर की अभियोजन शिकायत
रायपुर । संवाददाता: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ कथित शराब घोटाले के मामले में सोमवार को एक अभियोजन शिकायत दायर की. ईडी के वकील ने आरोप लगाया कि चैतन्य ने मनी लॉन्ड्रिंग में भूमिका निभाई और अपराध से प्राप्त धन को अपने व्यावसायिक उपक्रमों में उपयोग किया.
ईडी ने चैतन्य को 18 जुलाई को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. ईडी सूत्रों के अनुसार, "अभियोजन शिकायत 99 पेज की है, और इसके साथ 7,039 पेज के दस्तावेज और एक हार्ड डिस्क, जिसमें डिजिटल और अन्य साक्ष्य शामिल हैं, भी अदालत में जमा किए गए हैं."
ईडी के वकील सौरभ कुमार पांडे ने कहा, "आरोपी (चैतन्य) ने मनी लॉन्ड्रिंग में भूमिका निभाई है. उन्होंने अपराध से प्राप्त धन को बैंकिंग चैनलों के माध्यम से अपने व्यावसायिक उपक्रमों में उपयोग किया. इसके सबूत हमें मिले हैं, जो अदालत में प्रस्तुत किए गए हैं."
यह कथित शराब घोटाला 2019 से 2022 के बीच हुआ, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी. इस मामले में, वरिष्ठ सरकारी नौकरशाहों, राजनेताओं और आबकारी विभाग के अधिकारियों के एक समूह पर शराब की समानांतर बिक्री प्रणाली को बढ़ावा देने का आरोप है, जिसके कारण राज्य के खजाने को कोई आय नहीं हुई और सरकार को 2,161 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
ईडी ने अप्रैल 2024 में छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध शाखा/भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एसीबी) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी.
ईडी के अनुसार, चैतन्य का नाम एक व्यक्ति लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू के बयान से सामने आया. पप्पू ने दावा किया कि उन्होंने चैतन्य के साथ मिलकर शराब घोटाले से प्राप्त 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को संभाला.
पप्पू के अनुसार, वह एक व्यक्ति से धन इकट्ठा करता था और फिर उसे कथित तौर पर पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल को सौंपता था, जिसमें चैतन्य के साथ समन्वय शामिल था.
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि घोटाले से अवैध रूप से कमाए गए धन का उपयोग चैतन्य के 'विठ्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट' को बनाने के लिए किया गया, जो उनकी कंपनी बघेल डेवलपर्स के माध्यम से संचालित है.
इस कथित शराब घोटाले के सिलसिले में अब तक गिरफ्तार कुछ लोगों में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लाखमा, कथित मास्टरमाइंड अनवर ढेबर (पूर्व रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई), सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा (तत्कालीन छत्तीसगढ़ में संयुक्त सचिव), और आईटीएस अरुण पति त्रिपाठी (तत्कालीन वाणिज्य और उद्योग विभाग में विशेष सचिव और सीजी स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक) शामिल हैं.