छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में चैतन्य बघेल 'ultimate authority': ईडी
रायपुर । संवाददाता: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राज्य में एक संगठित शराब सिंडिकेट का "ultimate authority" करार दिया है. ईडी ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट के शीर्ष पर थे और उनके पास धन के संग्रह, चैनलाइजेशन और वितरण से संबंधित सभी प्रमुख निर्णयों का "ultimate authority" अधिकार था.
ईडी ने कहा कि 2019 में, जब भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे, तब इस शराब सिंडिकेट की शुरुआत हुई थी. चार्जशीट के अनुसार, इस सिंडिकेट के दैनिक कार्यों को संचालित करने के लिए आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को चुना गया था, जो इस कथित घोटाले में सह-अभियुक्त हैं.
ये दोनों सिंडिकेट के परिचालन और प्रशासनिक पहलुओं को संभालते थे, ताकि इसका सुचारू रूप से संचालन हो सके.
चैतन्य बघेल की मनी लॉन्ड्रिंग में भूमिका के बारे में ईडी ने कहा कि उन्होंने इस सिंडिकेट से उत्पन्न होने वाले लगभग 1,000 करोड़ रुपये की राशि को व्यक्तिगत रूप से संभाला.
चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि चैतन्य बघेल ने "जानबूझकर अपराध की आय को छिपाने, कब्जे में रखने, अधिग्रहण करने और उपयोग करने में सहायता की, और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों के साथ साजिश में काम किया." उनकी स्थिति, पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे के रूप में, उन्हें इस सिंडिकेट का ultimate authority बनाती थी.
ईडी ने 15 सितंबर 2025 को जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (VI) दमारूधर चौहान की अदालत में यह चार्जशीट दाखिल की थी. चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था. उस समय, ईडी ने कहा था कि उनकी गिरफ्तारी लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू के बयान के आधार पर की गई थी, जिन्होंने इस घोटाले से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को संभालने की बात कबूल की थी.
हालांकि, चैतन्य बघेल के वकील फैसल रिजवी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल की गिरफ्तारी "मनगढ़ंत बयानों" के आधार पर की गई है.