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छत्तीसगढ़ ड्रोन तकनीक अपनाने में पड़ोसी राज्यों से पिछड़ा

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14 फ़र. 2026, 03:04 PM 2 मिनट में पढ़ें 2

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नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार द्वारा देश में ड्रोन इकोसिस्टम को उदार बनाने के बड़े-बड़े दावों के बीच छत्तीसगढ़ से एक निराशाजनक तस्वीर सामने आई है. लोकसभा में सांसद सजदा अहमद द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे छत्तीसगढ़ में ड्रोन तकनीक की धीमी रफ्तार को उजागर करते हैं.


संसदीय रिपोर्ट के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक छत्तीसगढ़ में मात्र 161 ड्रोन ही पंजीकृत हैं. यह संख्या पड़ोसी राज्यों और देश के अन्य औद्योगिक राज्यों की तुलना में बेहद कम है. जहां महाराष्ट्र 8,210 ड्रोनों के साथ देश में शीर्ष पर है, वहीं मध्य प्रदेश में 480 ड्रोन पंजीकृत हैं. 

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वहीं, तमिलनाडु में 5878, तेलंगाना में 3657, कर्नाटक में 3258, हरियाणा में 2179 और आंध्रप्रदेश में 1876 ड्रोन पंजीकृत है. पूरे देश में कुल 38,475 ड्रोन पंजीकृत हैं. 


विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में, जहां घने वन क्षेत्र की निगरानी, आपदा प्रबंधन और दूरस्थ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ड्रोन की उपयोगिता सबसे अधिक है, वहां यह तकनीक अभी भी शुरुआती स्तर पर ही अटकी हुई है.


हालांकि, केंद्र सरकार ने 'ड्रोन नियम, 2021' और हालिया संशोधनों के जरिए नियमों को काफी सरल बनाया है. अब रिमोट पायलट सर्टिफिकेट के लिए पासपोर्ट की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और देश का लगभग 90 प्रतिशत हवाई क्षेत्र 'ग्रीन जोन' घोषित है, जहां बिना पूर्व अनुमति के ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं. 


केंद्र की इस उदार नीति के बावजूद छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और नागरिक स्तर पर ड्रोन अपनाने का उत्साह कम दिख रहा है.


विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नीतियों के सरलीकरण से काम नहीं चलेगा. राज्यों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण संस्थानों और औद्योगिक केंद्रों को सक्रिय करना होगा. छत्तीसगढ़ के पिछड़ने से यह सवाल उठने लगा है कि क्या राज्य सरकार इस आधुनिक तकनीक को जमीन पर उतारने और संबंधित स्टार्टअप्स को आकर्षित करने में विफल रही है?

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP