HC: पुलिस फ्रीज नहीं कर सकती बैंक खाता, मजिस्ट्रेट की अनुमति अनिवार्य
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने बैंक खातों को फ्रीज करने की पुलिसिया शक्तियों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट रूप से व्यवस्था दी है कि जांच अधिकारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 106 के तहत स्वतंत्र रूप से किसी भी बैंक खाते से होने वाले लेन-देन (डेबिट फ्रीज) को नहीं रोक सकते और न ही फंड होल्ड पर रख सकते हैं.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि 'अपराध की कमाई' से जुड़े किसी भी बैंक खाते को फ्रीज, कुर्क या होल्ड करने के लिए पुलिस को अनिवार्य रूप से धारा 107 के तहत संबंधित क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट के पास जाना होगा. बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ के रुख से सहमति जताते हुए खंडपीठ ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के बैंक खाते को फ्रीज करने और फंड होल्ड पर रखने के पुलिसिया निर्देशों को पूरी तरह से रद्द कर दिया है.
यह पूरा मामला एक वाणिज्यिक ऋण लेनदेन और उसके बाद दर्ज हुई धोखाधड़ी की प्राथमिकी से जुड़ा हुआ है. याचिकाकर्ता कंपनी ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड भारतीय रिजर्व बैंक और कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत पंजीकृत एक प्रतिष्ठित एनबीएफसी है, जो छोटे और मध्यम उद्योगों को ऋण समाधान प्रदान करती है.
कंपनी के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में दैनिक ऋण अदायगी (ईएमआई) के रूप में लगभग 12 से 15 करोड़ रुपये जमा होते हैं. जनवरी 2026 में कंपनी ने श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड (SKPL) के साथ 10 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा का समझौता किया था.
इसके बाद मार्च 2026 में एसकेपीएल ने रायपुर के मंदिर हसौद थाने में ओएफबी टेक लिमिटेड (OFB) से प्राप्त टीएमटी लोहे की छड़ों के कम वजन होने और करीब 6.9 लाख रुपये के शुरुआती नुकसान का आरोप लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज कराया. जांच के दौरान मंदिर हसौद के थाना प्रभारी (SHO) ने अचानक कोटक महिंद्रा बैंक को पत्र लिखकर ऑक्सीजो का पूरा बैंक खाता फ्रीज करने का निर्देश दे दिया, जिससे कंपनी का दैनिक वित्तीय कामकाज ठप हो गया.
इसके बाद कई कानूनी मोड़ आए, जहां पहले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर खाता बहाल हुआ, लेकिन रायपुर पुलिस ने फिर से पहले 53.47 करोड़ रुपये और बाद में संशोधित कर 43,38,375 रुपये की राशि को होल्ड पर रखने का आदेश जारी कर दिया. पुलिस के इसी मनमाने कदम को ऑक्सीजो ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में चुनौती दी थी.
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में बीएनएसएस की धारा 106 और 107 के बीच के वैधानिक अंतर को बारीकी से समझाया. अदालत ने कहा कि पुरानी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 102 के स्थान पर आई बीएनएसएस की धारा 106 मुख्य रूप से जांच के दौरान साक्ष्य सुरक्षित करने के लिए केवल संपत्ति की जब्ती से संबंधित है.
इसके विपरीत, बीएनएसएस की नई धारा 107 को विशेष रूप से अपराध की कमाई (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) को कुर्क, जब्त और बहाल करने के लिए शामिल किया गया है.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब्ती पुलिस द्वारा की जा सकती है, लेकिन कुर्की या खाता फ्रीज करने के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश पूर्व-आवश्यकता है, ताकि बिना उचित सुनवाई के किसी की आजीविका और संपत्ति के अधिकार का हनन न हो.
कोर्ट ने पुलिस के 13 अप्रैल और 27 अप्रैल 2026 के उन पत्रों को निरस्त कर दिया जिनके जरिए 43 लाख से अधिक की राशि होल्ड की गई थी. इसके साथ ही अदालत ने जांच एजेंसी को कानून के दायरे में रहकर धारा 107 के तहत मजिस्ट्रेट से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी है और निर्देश दिया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) रैंक से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा.