भाजपा ने भूपेश बघेल पर लगाये गंभीर आरोप
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुये कोयला ब्लॉक आवंटन और पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला है.
बीजेपी ने दस्तावेजों और तथ्यों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के दावों को झूठा करार दिया है.
छत्तीसगढ़ के वन एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भूपेश बघेल की सरकार ने अपने पांच साल के शासन में छत्तीसगढ़ को लूट का अड्डा बना दिया था.
उन्होंने शराब घोटाले, कोयला घोटाले, चावल घोटाले, गोठान घोटाले और पीएससी घोटाले जैसे कई मामलों में अनियमितताओं का आरोप लगाया. कश्यप ने कहा, "इन घोटालों के आरोपी अब एक-एक कर कानून के शिकंजे में आ रहे हैं. कांग्रेस अपराधियों का बचाव कर रही है, जो उनकी दोहरी मानसिकता को दर्शाता है."
बीजेपी ने दस्तावेजों के जरिये दावा किया कि भूपेश बघेल ने न केवल कोयला ब्लॉक आवंटन में अनियमिततायें कीं, बल्कि पर्यावरण नियमों को भी ताक पर रखा.
केदार कश्यप ने बताया कि साल 2010 में केंद्र की कांग्रेस सरकार ने हसदेव अरण्य को 'नो-गो जोन' घोषित किया था, लेकिन बाद में तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इसे 'गो एरिया' में बदल दिया. इसके बाद 2011 में तारा परसा ईस्ट और कांटे बेसन कोयला ब्लॉक खोलने का प्रस्ताव दिया गया.
उन्होंने आगे कहा कि भूपेश बघेल के कार्यकाल में 16 अक्टूबर 2019 को राज्य सरकार ने पर्यावरण स्वीकृति के लिए सिफारिश भेजी थी. इसके अलावा, 31 मार्च 2021 को गारे पेलमा सेक्टर-2 और मांड-रायगढ़ कोलफील्ड के लिए समझौता हुआ.
2022 और 2023 में वन स्वीकृति के लिये भी सिफारिशें भेजी गईं. बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मंत्री बीडी कल्ला ने कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए भूपेश बघेल को कई पत्र लिखे थे.
कांग्रेस ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और बीजेपी पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है.
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है.
यह विवाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है.
कोयला ब्लॉक आवंटन और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े दस्तावेजों के सामने आने के बाद दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर हमलावर हैं.