'इलेक्टोरल बॉन्ड' के कारण इंडिगो पर मेहरबान भाजपा- Cong
नई दिल्ली । डेस्क: इंडिगो उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्द होने से पैदा हुए संकट को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज कर दिया है. शनिवार को विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इंडिगो के प्रति नरम रवैया अपना रही है क्योंकि उसकी मूल कंपनी, इंटरग्लोब ने चुनावी बॉन्ड खरीदे थे. कांग्रेस ने दावा किया कि चल रहा इंडिगो संकट कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सेक्टर में 'एकाधिकार बनाने के भाजपा सरकार के अथक प्रयास का सीधा परिणाम' है.
पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों में दो कंपनियों का वर्चस्व है, विमानन उद्योग उनमें से एक है... लोगों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि भारत में एक जीवंत और प्रतिस्पर्धी एयरलाइन उद्योग कैसे एक दो-खिलाड़ियों वाले व्यवसाय में बदल गया, और क्यों."
इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कांग्रेस के लोकसभा सदस्य शशिकांत सेंथिल ने सवाल उठाया कि जनवरी 2024 में नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) की अधिसूचना जारी होने और जुलाई 2025 से आंशिक रूप से लागू होने के बावजूद, सरकार ने इंडिगो को अराजकता पैदा करने और यात्रियों को असुविधा पहुंचाने की अनुमति क्यों दी.
उन्होंने पूछा कि क्या केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू 'अभूतपूर्व संकट' की जिम्मेदारी लेंगे. सेंथिल ने DGCA की विफलता पर भी सवाल उठाया कि उसने इंडिगो को फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन नियमों का पालन करने के लिए सुनिश्चित क्यों नहीं किया.
'चुनावी बॉन्ड' खुलासे का हवाला देते हुए, सेंथिल ने कहा कि इंटरग्लोब समूह की संस्थाओं ने लगभग ₹36 करोड़ के चुनावी बॉन्ड खरीदे, जबकि इसके प्रमोटर राहुल भाटिया ने लगभग ₹20 करोड़ के बॉन्ड खरीदे, जिनमें से अधिकांश को भाजपा ने भुनाया.
उन्होंने सवाल किया, "क्या भाजपा की इंडिगो से वित्तीय निकटता ही यात्री सुरक्षा की कीमत पर दिखाई गई इस असाधारण नरमी के पीछे का वास्तविक कारण है?" उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संकट बीजेपी सरकार की 'प्रतिस्पर्धा को कुचलने, पसंदीदा को पुरस्कृत करने और पूरे राष्ट्रीय उद्योग को कॉर्पोरेट सहयोगियों के एक छोटे से दायरे के अनुरूप ढालने' की नीति का पूर्वानुमेय परिणाम है.
तिरुवल्लूर सांसद ने केंद्र और एयरलाइन पर यात्रियों की दुर्दशा के प्रति उदासीन होने का भी आरोप लगाया, और मंत्री राममोहन नायडू से इस संकट की जिम्मेदारी लेने की मांग की. उन्होंने केंद्र के उस कार्रवाई पर एक श्वेत पत्र जारी करने की भी मांग की, जो इंडिगो को नए नियमों का पालन करने के लिए सुनिश्चित करने हेतु की गई थी.